नईदिल्ली: महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल (Mahanadi Water Disputes Tribunal) के निर्देशानुसार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच नदी के पानी के बंटवारे को लेकर आज से देश की राजधानी नई दिल्ली में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गहन विचार-विमर्श का सिलसिला शुरू हो गया है. दोनों राज्यों के बीच यह उच्च स्तरीय बैठक 16 जून से 26 जून, 2026 तक यानी पूरे 11 दिनों तक लगातार चलेगी. इस मैराथन चर्चा का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे महान नदी के पानी के बंटवारे के विवाद का एक सौहार्दपूर्ण और तकनीकी समाधान खोजना है.

तकनीकी और कानूनी टीमें तय करेंगी रूपरेखाओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने ट्रिब्यूनल को सूचित किया था कि इस बैठक में दोनों राज्यों के वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों के साथ-साथ उच्च स्तरीय तकनीकी टीमें भी हिस्सा ले रही हैं. ये टीमें पानी की उपलब्धता, मौसमी प्रवाह (seasonal flow) और दोनों राज्यों की आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर बारीकी से चर्चा करेंगी. आवश्यकता पड़ने पर बैठक के दौरान केंद्रीय जल आयोग (CWC) के विशेषज्ञों की सहायता भी ली जाएगी, ताकि आंकड़ों और मापदंडों को निष्पक्षता से परखा जा सके. 27 जून को होगी अगली सुनवाईदरअसल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों ही राज्यों ने इस जटिल मामले पर एक व्यापक और विस्तृत द्विपक्षीय चर्चा की मांग की थी.

ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का एक अवसर दिया है. इस 11 दिवसीय बैठक में जिन बिंदुओं पर आम सहमति बनेगी या जो भी निष्कर्ष निकलेगा, उसे दोनों राज्यों द्वारा एक औपचारिक रिपोर्ट के रूप में महानदी ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले की अगली आधिकारिक सुनवाई 27 जून, 2026 को तय की गई है. यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि महानदी को ओडिशा की जीवनरेखा कहा जाता है, और छत्तीसगढ़ में इसके ऊपरी हिस्से पर बने बांधों एवं बैराजों के कारण दोनों राज्यों के बीच पानी के प्रवाह को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दिल्ली में हो रही इस गहन चर्चा से क्या कोई ठोस और सर्वमान्य समाधान निकल पाता है.