Dharm Desk: कर्मफलदाता शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है। शनि देव की कृपा बनी रहे इसके लिए शनिवार के दिन उन्हें लोग सरसों का तेल चढ़ाते हैं, काले वस्त्र और दूसरी काली वस्तुओं का दान करते हैं। लोहे का दान भी किया जाता है, लेकिन शनि देव की कृपा पाने के लिए केवल इन उपायों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होता है। शनिदेव की कृपा चाहते हैं तो सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपने कर्म और आचरण सही करे।

शनिदेव को कर्म का फल देने वाला कहा जाता है। वह न्याय प्रिया देवता है। इसलिए व्यक्ति जैसा कर्म करता है, उसे उसी के अनुसार परिणाम प्राप्त होते हैं। साढ़ेसाती या ढैय्या का समय भी व्यक्ति को अपने कर्मों, व्यवहार और जिम्मेदारियों पर ध्यान देने का संकेत देता है। ऐसे समय में धैर्य रखना और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाना बेहद जरूरी हो जाता है।

साढ़ेसाती का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में शनि के गोचर के आधार पर साढ़े साती का आकलन किया जाता है। जब शनि जन्म राशि से एक राशि पहले, जन्म राशि में और उसके बाद वाली राशि में गोचर करते हैं, तब साढ़े सात वर्ष की साढ़ेसाती बनती है। इस समय में शनि मीन राशि में विराजमान है। ऐसे में तीन राशियों पर साढ़ेसाती का प्रभाव बना हुआ है।

मेष राशि: साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है।

मीन राशि: साढ़ेसाती का दूसरा और मुख्य चरण है।

कुंभ राशि: साढ़ेसाती का अंतिम यानी तीसरा चरण चल रहा है। इस दौरान इन राशियों के जातकों को अपने काम और जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर रहने की जरूरत होगी। लापरवाही के बजाय धैर्य और अनु शासन के साथ आगे बढ़ना बेहतर रहेगा।

सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैय्या

शनि के मीन राशि में होने से सिंह और धनु राशि के जातकों पर ढैय्या का असर बना हुआ। ढाई साल की इस अवधि में व्यक्ति के धैर्य, व्यवहार और जिम्मेदारियों की परीक्षा होती है। ऐसे समय में कार्यक्षेत्र हो या परिवार, हर जहग सोच-समझकर व्यवहार करना चाहिए। किसी के साथ अन्याय या गलत व्यवहार करने से बनाच और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी इमानदारी से निभाना जरूरी है।

तेल और दान से पहले कर्मों को सुधारना जरूरी

शनिवार को शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाना या काली वस्तुओं का दान करना अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपने कर्मों को सुधारना भी जरूरी है । शनि देव की कृपा पाने के लिए व्यक्ति को रोज मर्रा के जीवन में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

न्यायप्रियता: किसी असहाय या कमजोर व्यक्ति के साथ गलत व्यवहार न करें। किसी का हक न छीनें और हर व्यक्ति के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करें।

श्रम का सम्मान: मजदूरों और कर्मचारियों के साथ सम्मान से पेश आएं। उनके का म और मेहनत की कद्र करें तथा उनके अधिकारों का ध्यान रखें।

छल से दूरी: झूठ, धोखे और अनुचित रास्तों से बचें। किसी को नुकसान पहुंचाकर अपना फायदा कमाने की कोशिश न करें।

कर्तव्य का पालन: जो जिम्मेदारी आपके हिस्से में है, उसे पूरी निष्ठा और इमानदारी के साथ निभाएं। अपने काम को टालने के बजाय उसे समय पर पूरा करने का प्रयास करें।

27 जुलाई से 11 दिसंबर तक वक्री शनि

शनि इस समय वक्री अवस्था में हैं। 27 जुलाई से शुरू हुई शनि की वक्री स्थिति 11 दिसंबर 2026 तक रहेगी। इस दौरान पुराने और अधूरे कामों को पूरा करने के साथ-साथ उन जिम्मेदारियों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जिन्हें लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है । वक्री शनि की इस अवधि को अपने काम और व्यवहार की समीक्षा करने का समय भी माना जा सकता है । इसलिए शनिवार को तेल चढ़ाने, दान करने और पूजा-पाठ करने के साथ अपने कर्मों पर भी ध्यान दें।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m