अयोध्या. टीवी डिबेट के दौरान निषाद समाज को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के बाद हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास पहली बार कैमरे के सामने आए हैं. उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा निषाद समाज का अपमान करना कभी नहीं था. उन्होंने कहा कि उनका विवाद कांग्रेस प्रवक्ता से व्यक्तिगत था और उन्होंने जो कुछ कहा, वह प्रवक्ता को संबोधित करके कहा था.

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महंत राजू दास ने निषाद समाज को भगवान श्रीराम के परम मित्र निषादराज का वंशज बताते हुए कहा कि वह इस समाज का कभी अपमान नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि उनका पूरा जीवन सनातन और प्रभु श्रीराम की सेवा के लिए समर्पित है और निषाद समाज उनके लिए पूज्य है.

‘मेरा विवाद कांग्रेस प्रवक्ता से था’

महंत राजू दास ने कहा कि टीवी डिबेट में सभ्यता से चर्चा चल रही थी, लेकिन उनके अनुसार कांग्रेस प्रवक्ता ने पहले अभद्रता शुरू की और उन्हें जूता दिखाया. इसके बाद दोनों के बीच व्यक्तिगत बहस बढ़ गई. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि कांग्रेस प्रवक्ता निषाद समाज से आते हैं. उनके मुताबिक, बहस के दौरान उन्होंने जो भी बात कही, वह कांग्रेस प्रवक्ता को लेकर थी, पूरे निषाद समाज के बारे में नहीं.

‘बयान को गलत तरीके से प्रचारित किया गया’

महंत ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनके बयान को संदर्भ से अलग करके प्रचारित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पूरे डिबेट के अंश को देखने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता पर विवाद को जातिगत रंग देने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया. महंत ने लोगों से अपील की कि वे टीवी डिबेट का पूरा हिस्सा देखें और उसके बाद ही मामले पर अपनी राय बनाएं.

कई जिलों में हुआ था विरोध प्रदर्शन

महंत के कथित बयान को लेकर निषाद समाज में नाराजगी सामने आई थी. मथुरा, आगरा समेत कई जिलों में समाज के लोगों ने प्रदर्शन किए और महंत राजू दास का पुतला फूंका था. प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की थी. विवाद के बीच महंत की ओर से पहली बार सार्वजनिक रूप से सफाई सामने आई है.

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‘निषादराज के वंशजों का अपमान नहीं कर सकता’

महंत राजू दास ने दोहराया कि निषाद समाज उनके लिए सम्मान और आस्था का विषय है. उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम और निषादराज के संबंध को वह पूरी श्रद्धा से देखते हैं और निषादराज के वंशजों का अपमान करने की कल्पना भी नहीं कर सकते. महंत की सफाई के बाद अब यह देखना अहम होगा कि निषाद समाज और इस विवाद से जुड़े लोग उनके स्पष्टीकरण को किस तरह लेते हैं.