मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को गैस, राशन, खाद्यान्न, डीजल एवं पेट्रोल सहित आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. सचिवालय में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में राहत एवं खाद्य सामग्री के वितरण के लिए पहले से ही विस्तृत रणनीति तैयार कर ली जाए. ताकि दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित सहायता पहुंचाई जा सके. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को मानसून अवधि के दौरान संभावित संक्रामक और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए. उन्होंने अभी से फॉगिंग अभियान चलाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट मोड में रखने को कहा. साथ ही हेली एम्बुलेंस सेवाओं को भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए, ताकि आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके.
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने हाइड्रोमेट सिस्टम, सेंसर और सेटेलाइट फोन का नियमित परीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनियां व अलर्ट आमजन तक त्वरित रूप से पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि लोग समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठा सकें. उन्होंने सचेत एप तथा सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के अधिकाधिक उपयोग पर विशेष जोर दिया. मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आपदा संबंधी भ्रामक और फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने पर सख्त नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इस प्रकार की भ्रामक सूचनाएं आमजन में अनावश्यक भय और भ्रम की स्थिति उत्पन्न करती हैं, जिससे आपदा प्रबंधन कार्य प्रभावित होते हैं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत ऐसे मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
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इस दौरान, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 525 हाइड्रोमेट सेंसर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है. उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान में 3 डॉप्लर वेदर रडार स्थापित हैं और 3 अतिरिक्त डॉप्लर रडार स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं, जिससे मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और ज्यादा मजबूत होगी. उन्होंने जानकारी दी कि पिथौरागढ़ में आरएसआरडब्ल्यू (रेडियो सांडे, रेडिया विंड) की स्थापना की जानी प्रस्तावित है. इसके स्थापित होने से पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियों का अधिक सटीक और स्थानीय स्तर पर पूर्वानुमान प्राप्त हो सकेगा, जिससे समय रहते चेतावनी जारी कर जनहानि और नुकसान को कम करने में सहायता मिलेगी.
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