वैभव शिव पांडेय, रायपुर। छत्तीसगढ़… एक ऐसा राज्य जिसका संवैधानिक रूप से पृथक राज्य का इतिहास भले महज 25 वर्ष ही पुराना है. लेकिन आदिकाल से छत्तीसगढ़ की अपनी एक पृथक पहचान रही है. फिर चाहे वह पाषाण युग से हो या फिर पौराणिक काल से. छत्तीसगढ़ की अपनी अलग पहचान भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषिक रूप में सदैव से कायम है. आदिवासी बाहुल्य राज्य होने और उत्तर से लेकर दक्षिण तक वनों और पहाड़ों से घिरे होने के बाद भी छत्तीसगढ़ की बौद्धिक चेतना की गूँज देश-दुनिया में होती रही है. प्राचीन ऋषि परंपरा से लेकर आदिम जनजाति संस्कृति और आधुनिक काल खंड तक छत्तीसगढ़ अपनी क्षमता से दुनिया को अवगत कराते रहा है.
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कला-संस्कृति की यह प्राचीतनम धरती साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अग्रणी रही है. फिर चाहे दुनिया के सबसे प्राचीन नाट्शाला की बात हो या संस्कृत के महान कवि कालिदास की मेघदुत की रचना की. या फिर हिंदी की पहली कहानी टोकरी भर मिट्टी की हो या फिर छायावाद के प्रवर्तक मुकुट धर पाण्डेय के रूप में. छत्तीसगढ़ बराबर सभी क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व करते रहा है.
30 मई 2026 को जब हम भारत में हिंदी समाचार-पत्र उदंत मार्तंड के साथ हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों के इतिहास की चर्चा कर रहे हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि छत्तीसगढ़ में भी हिंदी पत्रकारिता का इतिहास कैसा रहा है ? और वर्तमान में किस रूप में जारी है.
छत्तीसगढ़ में हिंदी पत्रकारिता का इतिहास करीब 136 वर्ष पुराना है. छत्तीसगढ़ में पत्र-पत्रिकाओं की शुरुआत राजनाँदगाँव रियासत में प्रजा-हितैषी पत्र से होती है. इसका प्रकाशन सन् 1889-90 में भगवानदीन सिसौठिया ने किया था. हालांकि, माना जाता है कि इसमें रियासती छाप थी. क्योंकि यह पत्र तत्कालीन शासक बलराम दास के संरक्षण में निकलता था.
इस तरह छ्त्तीसगढ़ में वास्तविक रूप में पत्रकारिता का आरंभकाल सन् 1990 में पेंडरा से प्रकाशित छत्तीसगढ़ मित्र नामक पत्रिका से माना जाता है. इस पत्रिका के संपादक पं. माधव राम सप्रे और पं. रामराव चिंचोलकर थे. प्रकाशक पं. वामनराव लाखे थे. इस पत्र में हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकारों का जुड़ाव रहा. लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के बीच 2 वर्ष की अल्पावधि में इसका प्रकाशन बंद हो गया.
इसके बाद सन् 1914 रायपुर से में कंबीर पंथी मासिक पत्रिका प्रकाशन हुआ. हालांकि यह भी अधिक दिनों तक नहीं चल पाई. ये और बात है कि स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में अन्य प्रदेशों से प्रकाशित हिंदी केसरी, कर्मवीर जैसे कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन राज्य के ही नामचीन साहित्यकार करते रहे.
सन् 1920 के बाद बिलासपुर डिस्ट्रिक्ट कौंसिल ने ‘विकास‘ नामक पत्रिका निकाली थी। सन् 1937 में ‘सचेत‘ साप्ताहिक का प्रकाशन हुआ था, पर वह थोड़े समय तक ही चला। 1923 में बिलासपुर से कुलदीप सहाय के संपादन में विकास और रायगढ़ में मनोहर प्रसाद मिश्र के संपादन में छत्तीसगढ़ मासिक पत्रिका निकाली गई.
सन् 1934 में पत्रकार कन्हैयालाल वर्मा ने नागपुर से प्रकाशित हिंदवासी का संपादन किया, जबकि 1935 में पं. सुंदरलाल त्रिपाठी के संपादन में रायपुर से उत्थान पत्रिका प्रारंभ हुई. सन् 1937 में इस पत्रिका का प्रकाशन बंद हो गया. 1935 में ही रायपुर से मासिक पत्रिका आलोक और शिक्षा का प्रकाशन हुआ. इसके संपादक स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी और केशव प्रसाद वर्मा थे.
इसी दौर में ही 1936 में दुर्ग से हैहयवंश और 1937 में सरगुजा से सरगुजा संदेश और धमतरी से नवयुवक पत्रों का प्रकाशन हुआ. लेकिन छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता को धार 1940 के दशक के बाद मिली.
सन् 1941 में बिलासपुर से एक साप्ताहिक निकलना शुरू हुआ ‘पराक्रम‘, जिसके सम्पादक श्री रामकृष्ण पाण्डेय थे (उन्हें लोग पराक्रमी पांडे कहने लगे थे.
1942 में केशव प्रसाद वर्मा और स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी के संपादन में रायपुर से पहला साप्ताहिक समाचार-पत्र अग्रदूत का प्रकाशन हुआ. आज यह दैनिक अखबार और निरंतर प्रकाशन जारी है. 1943-44 में साप्ताहिक सावधान का प्रकाशन रायपुर से ही शिवनारायण द्विदेदी के संपादन में हुआ था.
सन् 1946 में पं. रविशंकर शुक्ल की ओर से रायपुर में साप्ताहिक महाकोशल अखबार शुरू किया गया. आजादी के बाद सन् 1951 से यह दैनिक अखबार के रूप में प्रकाशित होने लगा और आज भी यह निरंतर जारी है. छत्तीसगढ़ से प्रकाशित होने वाला यह पहला दैनिक अखबार है.
सन् में 1947 में छ्त्तीसगढ़ केशरी और 1948 में श्री और नव ज्योति पत्रिका का प्रकाशन हुआ. 1947 में खैरागढ़ से ‘प्रजा बन्धु‘ पाक्षिक का प्रकाशन आरंभ हुआ परन्तु अगले वर्ष ही वह बन्द हो गया. 1947 में दुर्ग से ‘जिन्दगी‘ साप्ताहिक प्रकाशित हुआ. 1948 में राजनाँदगाँव से पाक्षिक ‘स्वतन्त्र भारत‘ का प्रकाशन शुरू हुआ.
बस्तर से आदिम वनांचलन क्षेत्र से भी कई दशकों पहले पत्रकारिता की शुरुआत हो गई थी. सन् 1948 में मतीश बनर्जी और पं० सुन्दरलाल त्रिपाठी के संपादन में ‘दण्डकारण्य समाचार‘ प्रकाशन शुरू हुआ, जो आजतक जारी है.
सन् 1950 में रायपुर से ठा. प्यारेलाल सिंह ने राष्ट्रबंधु समाचार-पत्र निकाला. 1950 में ही महासमुंद से सेवक, रायपुर से नव राष्ट्र, ‘प्रकाश‘ साप्ताहिक प्रकाशित हुआ था. वहीं लोकमित्र‘ साप्ताहिक वृन्दावन बिहारी मिश्र के संपादन में 1953 से निकला था.
1950 में रायगढ़ से ‘अधिकार‘ नामक साप्ताहिक और 1951 में ‘बापू‘ नामक हिन्दी मासिक प्रत्रिका का प्रकाशित हुआ. इसी दौर में ‘राष्ट्र केसरी‘ नामक हिन्दी साप्ताहिक भी यहीं से निकला. 1956 में इन दोनों समाचार पत्रों को मिलाकर ‘नई बात‘ नामक नया हिन्दी साप्ताहिक का भी प्रकाशन हुआ था. 1951 में रायपुर से ही रायपुर समाचार का भी प्रकाशन हुआ था.
सन् 1953 में रायगढ़ से ही ‘भूचाल‘ साप्ताहिक और 1957 में ‘महाभारत‘ हिन्दी मासिक भी प्रकाशित हुई थी. 53 में राजनाँदगाँव से ‘जनतन्त्र‘ साप्ताहिक का प्रकाशन हुआ. जनतंत्र के संपादक प्रसिद्ध साहित्यकार बलदेव प्रसाद मिश्र थे. इसके साथ ही राजनांदगांव इसी वर्ष साप्ताहिक ‘तूफान‘ श्रीकाले के संपादन में प्रकाशित हुआ था.
इसी वर्ष ‘नव समाज‘ साप्ताहिक, ‘नई दिशा‘ त्रैमासिक और ‘मुक्ति‘ साप्ताहिक भी निकले। ‘नई दिशा‘ के सम्पादक श्रीकान्त वर्मा और रामकृष्ण श्रीवास्तव थे. राजनांदगांव से 15 अगस्त 1956 को साप्ताहिक ‘सबेरा‘ का प्रकाशन शुरू हुआ था. 1956 में रायपुर से खूबचंद बघेल ने साप्ताहिक छत्तीसगढ़ प्रकाशित किया था. वहीं 1957 में रायपुर टाइम्स का प्रकाशन हुआ था.
60 के दशक में रायपुर से कई बड़े समाचार-पत्रों का प्रकाशन शुरू हुआ. 1959 में वरिष्ठ पत्रकार शिवनारायण द्विवेदी के संपादन मे रायपुर से नवभारत और मायाराम सुरजन के संपादन में नई-दुनिया का प्रकाशन हुआ था. बाद में नई-दुनिया का नाम बदलकर उसे देशबंधु कर दिया गया था. 1959 में रायपर से पहला सांध्य दैनिक मध्यप्रदेश का प्रकाशन हुआ था.
इस वर्ष में 11 और समाचार-पत्रों का प्रकाशन हुआ था. जैसे- सांध्य दैनिक विचार और समाचार, रायपुर न्यूज, राय चक्र, छत्तीसगढ़ समाचार, श्यामसुंदर और तहलका साप्ताहिक. दुर्ग से 1958 में ‘ज्वालामुखी‘ का प्रकाशन हुआ जो 1967 तक चला। इसके प्रकाशक श्री कपिलनाथ ब्रह्मभट्ट थे। 1959 में ‘भारत केसरी‘ साप्ताहिक राजनाँदगाँव से निकला था.
सन् 1959 में सक्ति से ‘अवतार‘ पाक्षिक और चाँपा से ‘सक्ति टाइम्स‘ पाक्षिक निकलना प्रकाशित हुआ था. 1960 में बिलासपुर से ‘मुक्ति दूत‘ दैनिक का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया. बिलासपुर से ही इस वर्ष समर बहादुर सिंह के संपादन में ‘राष्ट्रवाणी‘ निकलता रहा है. फिर रवीन्द्र प्रताप सिंह के संपादन में सरगुजा से ‘सरगुजा सन्देश‘ निकला था.
सन् 1961 में बिलासपुर से ‘नया तूफान‘ साप्ताहिक, ‘छत्तीसगढ़ सह गौरव‘ मासिक, ‘ज्ञान यज्ञ‘ मासिक और ‘बवंडर‘ साप्ताहिक निकले. सन् 61 में ही रायपुर से दैनिक युगधर्म का प्रकाशन हुआ. इसी वर्ष में अनमोल, जननाद, भारत टाइम्स और सहयोग दर्शन का भी प्रकाशन हुआ था. इसके बाद रायपुर पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन का एक बड़ा केंद्र बन गया और निरंतर समाचार और साहित्यिक पत्रों का प्रकाशन जारी रहा.
सन् 1965-67 के दौरान दुर्ग से ‘चिन्तक‘, दुर्ग टाइम्स, छत्तीसगढ़, श्रमदेव जैसे साप्ताहिक अखबार और ‘अनन्त‘ मासिक पत्रिका प्रकाशित हुए. इसी दौर में ही बिलासपुर से बिलासपुर टाइम्स‘ साप्ताहिक का प्रकाशन का डी० पी० चौबे ने किया. वर्ष 1974 में बी० आर० यादव के सहयोग से इसे दैनिक अखबार कर दिया गया. इसी बीच से बिलासपुर में ‘बूंद और मोती‘ के० भगवान के सम्पादन में, हसदेव टाइम्स‘ कृष्ण कुमार शर्मा के संपादन में प्रकाशित हो चुके थे. वहीं कोरबा साप्ताहिक ‘वक्ता‘ राजेन्द्र गुप्त के संपादन में शुरू हो गया था.
हालांकि, बिलासपुर में पत्रकारिता को धार 1977 से बिलासपुर से दैनिक ‘लोक स्वर‘ से मिली. इसका संपादन श्यामलाल चतुर्वेदी, डा० सच्चिदानन्द पाण्डे और रमेश नैयर ने किया था. 1978 में ‘सरगुजा वाणी‘ का प्रकाशन शुरू हुआ था. 70 के दशक के बाद तो छत्तीसगढ़ में कई बड़े पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन शुरू हो गया था.
80 के दशक में 1986 में वरिष्ठ पत्रकार गोविंद लाल वोरा की ओर से अमृत संदेश का प्रकाशन शुरू किया गया. 1992 में दैनिक भास्कर का रायपुर से प्रकाशन शुरू हो गया था. 2001 में हरिभूमि और 2006 में नई दुनिया समाचार-पत्र के साथ 2010 में पत्रिका जैसे नामचीन अखबार के साथ छत्तीसगढ़ हिंदी पत्रकारिता का एक गढ़ बन चुका था.
इन सबके बीच हिंदी टीवी समाचार चैलनों का केंद्र भी छत्तीसगढ़ बन गया था. 2001 में केबल न्यूज नेटवर्क में आकाश चैनल के साथ कारवां आगे बढ़ा. फिर एम चैनल, अभी तक की शुरुआत हुई. इसके बाद सैटेलाइट चैनलों में सहारा, ईटीवी, साधना, जी न्यूज, वाइस ऑफ इंडिया, खबर भारती, पी-7, इंडिया न्यूज, स्वराज एक्सप्रेस, न्यूज एक्सप्रेस, आईबीसी-24, आईएनएच-24, न्यूज24 जैसे अनगिनत क्षेत्रीय समाचार चैलन संचालित हो रहे हैं.
वहीं आज वेब न्यूज का दौर है. प्रदेश में सैकड़ों की संख्या में वेब न्यूज पोर्टल संचालित हैं. इनमें मुख्य रूप से लल्लूराम डॉट कॉम, एनपीजी, भास्कर डॉट कॉम जैसे नाम शामिल हैं.
इसी तरह से अगर देखा जाए तो उन्नीसवीं सदी के अंत से लेकर 20वीं सदी के प्रारंभ और 21 सदी के इस दौर में छत्तीसगढ़ में हिंदी पत्रकारिता का एक गौरवपूर्ण इतिहास मिलता है. राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष के इस इतिहास में छत्तीसगढ़ का योगदान भी अमूल्य रहा है.
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