शब्बीर अहमद, भोपाल। राजधानी भोपाल की जीवनदायिनी कहे जाने वाले ‘बड़े तालाब’ (भोज वेटलैंड) पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। लगातार आदेशों की अनदेखी किए जाने से नाराज एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने भोपाल नगर निगम (BMC) की कार्यशैली पर न केवल सख्त नाराजगी जताई, बल्कि निगम पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया है। ट्रिब्यूनल ने दो टूक कहा है कि अब इस तरह के लापरवाह रवैये को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पांच बार मांगी एक्शन रिपोर्ट
यह पूरा मामला रामसर साइट भोज वेटलैंड के संरक्षण से जुड़ा हुआ है। एनजीटी ने इस मामले में नगर निगम से पांच बार एक्शन टेकन रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी थी। लेकिन हर बार जिम्मेदार अफसर केवल यह मौखिक आश्वासन देते रहे कि ‘कार्रवाई की जा रही है।’ कोर्ट के बार-बार निर्देश देने के बावजूद नगर निगम ने आज तक धरातल की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने वाली स्टेटस रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश नहीं की। अफसरों की इसी टालमटोल नीति से नाराज होकर एनजीटी ने जुर्माने की यह कार्रवाई की है।
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बड़े तालाब के FTL एरिया में 290 अवैध निर्माण
यह पूरी कानूनी लड़ाई बड़े तालाब को बचाने से जुड़ी हुई है। दरअसल, भोपाल बड़े तालाब के एफटीएल (Full Tank Level) एरिया में करीब 290 अवैध अतिक्रमण और निर्माण चिन्हित किए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस बेहद संवेदनशील क्षेत्र में- धड़ल्ले से अवैध और स्थायी निर्माण किए जा रहे हैं। भारी मात्रा में मलबा और कचरा डंप (फैंका) किया जा रहा है। अवैध रूप से भूमि भराव (लैंड फिलिंग) की जा रही है। इन सब गतिविधियों के कारण तालाब का प्राकृतिक जल प्रवाह पूरी तरह बाधित हो चुका है।
22 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
एनजीटी ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण और रामसर साइट को नुकसान पहुंचाने वाले इन अतिक्रमणों पर अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं, इसका पूरा ब्योरा नगर निगम को देना होगा। ट्रिब्यूनल ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय की है। अदालत के इस सख्त फैसले के बाद अब भोपाल नगर निगम और जिला प्रशासन के अमले में हड़कंप मच गया है। अब देखना यह होगा कि अगली सुनवाई से पहले नगर निगम बड़े तालाब के एफटीएल एरिया से अवैध निर्माणों को हटाने के लिए क्या जमीनी कार्रवाई करता है।
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