सुरेश पांडेय, सिंगरौली। सिंगरौली में रेत के अवैध कारोबार को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आरोप लग रहे हैं कि जिले में रेत के खेल में रसूखदारों का संरक्षण हासिल है। सिंगरौली विधायक के पुत्र और दामाद पर भी रेत चोरी के आरोप लगाए गए हैं, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं प्रशासन ने अवैध रेत परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जांच अभियान तेज कर दिया है।

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राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम जब मैदान में उतरी तो रेत कारोबारियों में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान कई वाहन चालक मौके से वाहन छोड़कर भाग निकले। इसी बीच एक हाइवा ने प्रशासन की जांच को और गंभीर बना दिया। जांच में सामने आया कि हाइवा में लगी ट्रांजिट पास यानी टीपी सिंगरौली की नहीं बल्कि करीब 900 किलोमीटर दूर बुरहानपुर जिले की थी। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक जिले की टीपी दूसरे जिले में कैसे इस्तेमाल हो रही थी? क्या यह सिस्टम की लापरवाही है या फिर रेत परिवहन के नाम पर चल रहा कोई बड़ा फर्जीवाड़ा।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर टीपी सही थी तो वाहन इतनी लंबी दूरी तय कर सिंगरौली कैसे पहुंचा? और अगर दस्तावेजों में गड़बड़ी थी तो इसके पीछे कौन लोग हैं। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और अवैध खनन या परिवहन में शामिल किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा। लेकिन इस कार्रवाई के बाद सिंगरौली में रेत के कारोबार और उसमें शामिल प्रभावशाली लोगों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रेत की टीपी बुरहानपुर की, वाहन सिंगरौली में… आखिर किसके इशारे पर चल रहा था यह खेल जांच के बाद ही खुलेगा रेत के इस रहस्य का राज।

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