संजय पाटीदार, भोपाल। मध्यप्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था में एक बड़ी धांधली का मामला सामने आया है। 29 जुलाई को ‘ई-टोकन’ व्यवस्था बंद किए जाने के महज 13 दिनों के भीतर राज्य के विभिन्न हिस्सों में 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का संदिग्ध उठाव दर्ज किया गया है। कुछ जिलों में तो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 8 से 9 गुना तक ज्यादा खाद उठाई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने 15 जिलों के कलेक्टरों को जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
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जिलेवार उठाव के चौंकाने वाले आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ई-टोकन व्यवस्था खत्म होते ही खाद के उठाव में अप्रत्याशित उछाल देखा गया। छतरपुर: महज 12 दिनों में 2500 मीट्रिक टन खाद का उठाव हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में मात्र 255 मीट्रिक टन का उठाव दर्ज किया गया था। 9 गुना तक उठाव वाले जिले: अशोकनगर, गुना, जबलपुर, रायसेन, सिवनी, देवास, सतना, धार और शिवपुरी। 8 गुना तक उठाव वाले जिले: आगर मालवा, सीहोर, इंदौर, मंदसौर और बैतूल।
कांग्रेस का बड़ा हमला
खाद के इस असामान्य और भारी उठाव पर अब प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है। अभिनव बरोलिया, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य सरकार पर कालाबाजारी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का सीधा आरोप लगाया है। “ई-टोकन व्यवस्था को बंद करके भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। भाजपा सरकार में जांच और कार्रवाई के नाम पर केवल दिखावा होता है। एक तरफ मध्यप्रदेश का किसान खाद के लिए परेशान हो रहा है और दूसरी तरफ खाद गायब की जा रही है। सरकार किसानों के जज्बातों के साथ खेल खेल रही है।
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