राजधानी दिल्ली में पिछले एक महीने के भीतर हुए दो भीषण अग्निकांडों में 31 से अधिक लोगों की मौत के बाद अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इन घटनाओं के बाद अब दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने शहरभर की इमारतों के लिए नए और सख्त सुरक्षा मानक लागू करने की दिशा में पहल शुरू की है। जानकारी के अनुसार, विभाग ने दिल्ली सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें सभी प्रकार की इमारतों आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक में स्मोक डिटेक्टर और ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम को अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इन आधुनिक अग्नि सुरक्षा प्रणालियों को व्यापक स्तर पर लागू किया जाता है, तो आग लगने की घटनाओं में जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विभाग का दावा है कि इससे अग्निकांडों में होने वाली मौतों में लगभग 97% तक कमी लाई जा सकती है।

दो बड़े हादसों के बाद सख्ती

यह प्रस्ताव विवेक विहार में 3 मई को हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद तैयार कर सरकार को भेजा गया था। उस हादसे में एक रिहायशी इमारत में एसी ब्लास्ट के बाद आग भड़क गई थी, जिसमें दो परिवारों के नौ लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में छोटे बच्चे भी शामिल थे, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया था। इसके ठीक एक महीने बाद, 3 जून को दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया। इस हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 13 विदेशी नागरिक शामिल थे। लगातार हुई इन घटनाओं ने राजधानी में अग्नि सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर कर दिया है और नई बहस छेड़ दी है।

फायर विभाग का मानना है कि यदि आधुनिक अग्नि सुरक्षा उपकरण जैसे स्मोक डिटेक्टर और ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम को सभी भवनों में अनिवार्य कर दिया जाए, तो आग लगने की स्थिति में समय रहते चेतावनी मिल सकती है और बड़े पैमाने पर जनहानि को रोका जा सकता है। अधिकारियों का दावा है कि इससे अग्निकांडों में होने वाली मौतों में भारी कमी लाई जा सकती है। प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि नए भवनों के साथ-साथ पुराने भवनों में भी चरणबद्ध तरीके से इन सुरक्षा उपकरणों की स्थापना की जाए, ताकि पूरे शहर में एक समान और मजबूत अग्नि सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सके।

जांच में खुलासा

दिल्ली में हाल ही में हुए दो बड़े अग्निकांडों की जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई है। फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोनों ही घटनास्थलों पर शुरुआती चेतावनी देने वाले अग्नि सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं थे। जांच में पाया गया कि न तो इमारतों में स्मोक डिटेक्टर लगाए गए थे और न ही ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम उपलब्ध था। इसी कारण आग लगने के बाद लोगों को समय रहते चेतावनी नहीं मिल सकी और स्थिति तेजी से गंभीर हो गई।

महज 15 सेकंड में मिल जाएगा खतरे का संकेत

दिल्ली फायर सर्विस द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में इन उपकरणों की कार्यप्रणाली और उनकी प्रभावशीलता को विस्तार से बताया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, स्मोक डिटेक्टर जैसे ही किसी इमारत में धुआं फैलना शुरू होता है, वह लगभग 15 सेकंड के भीतर अलर्ट सिग्नल जारी कर देगा। इससे आग की शुरुआती अवस्था में ही लोगों को चेतावनी मिल सकेगी और समय रहते सुरक्षित निकासी संभव हो सकेगी।

इसी तरह, स्प्रिंकलर सिस्टम को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि जैसे ही किसी स्थान का तापमान 68 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, यह स्वतः सक्रिय होकर पानी का छिड़काव शुरू कर देगा। इससे आग को फैलने से पहले ही नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि इन दोनों प्रणालियों के व्यापक उपयोग से आग लगने की घटनाओं में शुरुआती चरण में ही नियंत्रण संभव हो सकेगा। इससे न केवल संपत्ति के नुकसान को कम किया जा सकता है, बल्कि बड़ी संख्या में जानें भी बचाई जा सकती हैं।

हर साल आग से  करीब 100 लोगों की मौत

विभाग के अनुसार, दिल्ली में हर वर्ष औसतन लगभग 100 लोगों की मौत आग लगने की घटनाओं में हो जाती है। अधिकारियों का दावा है कि यदि आधुनिक अग्नि सुरक्षा तकनीकों जैसे स्मोक डिटेक्टर और ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाए, तो आग से होने वाली मौतों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। विभाग का अनुमान है कि प्रभावी तकनीकी व्यवस्था लागू होने पर यह आंकड़ा घटकर केवल तीन तक पहुंच सकता है।

पहले से क्यों ज्यादा खतरनाक हो गई हैं आग की घटनाएं

फायर सुरक्षा विशेषज्ञों ने आधुनिक भवनों की बनावट और उसमें इस्तेमाल हो रही सामग्री को लेकर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की इमारतों में आग लगने की घटनाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से फैलती हैं, जिससे बचाव के लिए उपलब्ध समय काफी कम हो गया है। आधुनिक भवनों में कम वेंटिलेशन, एयर कंडीशनिंग सिस्टम का बढ़ता उपयोग, सिंथेटिक फर्नीचर और अन्य कृत्रिम सामग्री आग के तेजी से फैलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सभी तत्व आग को अधिक तीव्र और खतरनाक बना देते हैं। फायर सेफ्टी विशेषज्ञों का कहना है कि एक दशक पहले किसी कमरे में आग लगने के बाद उसके पूरी तरह फैलने में लगभग 15 से 17 मिनट का समय लगता था, जबकि अब यह समय घटकर करीब 5 मिनट रह गया है। इस बदलाव के कारण अब आग लगने की स्थिति में लोगों के पास प्रतिक्रिया देने और सुरक्षित बाहर निकलने का समय बहुत सीमित हो गया है।

72 लाख इमारतें, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेहद सीमित

फायर विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शहर में लगभग 72 लाख इमारतें मौजूद हैं, लेकिन स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर जैसे आधुनिक सुरक्षा सिस्टम केवल करीब 10 हजार भवनों तक ही सीमित हैं। इस भारी अंतर को देखते हुए दिल्ली फायर सर्विस ने सरकार को एक चरणबद्ध कार्ययोजना (phased implementation plan) का सुझाव दिया है, ताकि राजधानी की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाया जा सके। प्रस्ताव के अनुसार, नए नियम लागू होने के बाद बनने वाली सभी नई इमारतों में स्मोक डिटेक्टर और ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम को अनिवार्य रूप से शुरू से ही स्थापित करना होगा। इससे भविष्य में बनने वाली इमारतें अधिक सुरक्षित हो सकेंगी। इसके साथ ही मौजूदा भवनों के लिए भी एक समयसीमा तय करने का सुझाव दिया गया है, जिसके भीतर उन्हें इन आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों को स्थापित करना अनिवार्य होगा।

भवन मालिकों को मिल सकती है आर्थिक राहत

राजधानी में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में फायर विभाग अब केवल नियमों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि लोगों और भवन मालिकों को सुरक्षा उपकरण अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दे रहा है। फायर विभाग का मानना है कि स्मोक डिटेक्टर और ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर जैसे आधुनिक सुरक्षा उपकरणों को अनिवार्य करने के साथ-साथ उन्हें अपनाने के लिए आर्थिक सहायता भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार सब्सिडी, कर छूट या अन्य राहत योजनाओं पर विचार कर सकती है।

नियमों के साथ जागरूकता पर भी फोकस

दिल्ली फायर सर्विस केवल नीतिगत बदलावों तक सीमित नहीं रहकर अब जमीनी स्तर पर भी अग्नि सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय हो गई है। विभाग ने राजधानी के 191 से अधिक इलाकों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को आग से बचाव और आपात स्थिति में सही प्रतिक्रिया देने की जानकारी दी है। फायर विभाग के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों को केवल दर्शक न बनाकर उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों में सक्रिय मददगार के रूप में तैयार करना है, ताकि आग लगने की स्थिति में शुरुआती मिनटों में ही नुकसान को कम किया जा सके।

अभियान के तहत दिल्ली में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), मार्केट एसोसिएशन, मंदिर समितियों और स्थानीय समूहों के सहयोग से पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अब तक इस कार्यक्रम के तहत 13 हजार से अधिक लोगों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी, अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) के उपयोग और आपातकालीन परिस्थितियों में घबराहट से बचते हुए राहत कार्यों में सहयोग करने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। फायर विभाग का मानना है कि आपदा की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यदि आम नागरिकों को प्राथमिक स्तर का प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे पेशेवर मदद के मौके पर पहुंचने से पहले कई जिंदगियों को बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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