नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का दायरा आने वाले वर्षों में और बड़ा होने जा रहा है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने दिल्ली के आसपास 5 से 8 नए शहर विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह योजना ‘रीजनल प्लान-2041’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दिल्ली पर बढ़ते दबाव को कम करना और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित योजना के तहत विकसित किए जाने वाले नए शहरों को आधुनिक शहरी सुविधाओं, बेहतर आधारभूत ढांचे और रोजगार के अवसरों से लैस किया जाएगा। इन शहरों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि लोगों को काम, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए दिल्ली पर अत्यधिक निर्भर न रहना पड़े।

16 जून को होने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) की बैठक से पहले राज्यों के साथ साझा किए गए मसौदे में दिल्ली के आसपास 5 से 8 नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य दिल्ली में बढ़ती भीड़भाड़ को कम करना और आने वाले दशकों की आवास एवं बुनियादी ढांचे की जरूरतों को पूरा करना है। ‘रीजनल प्लान-2041’ के तहत तैयार इस खाके में मौजूदा बस्तियों के पुनर्विकास के साथ-साथ नई आधुनिक बस्तियों के निर्माण का रोडमैप भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार, दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक संभावनाओं और परिवहन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 5 से 8 ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित की जा सकती हैं।

Auric मॉडल पर होगा विकास

योजना के अनुसार, प्रस्तावित नए शहरों को Auric (Aurangabad Industrial City) की तर्ज पर विकसित किया जा सकता है। महाराष्ट्र के औरंगाबाद में विकसित Auric देश की प्रमुख ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में शामिल है। करीब 10 हजार एकड़ क्षेत्र में फैली यह स्मार्ट सिटी दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) परियोजना का हिस्सा है। Auric को अत्याधुनिक शहरी नियोजन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सेवाओं, औद्योगिक निवेश, हरित विकास और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। इसी मॉडल को आधार बनाकर एनसीआर के नए शहरों में भी विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करने की योजना है।

30 मिनट में दिल्ली पहुंचने का लक्ष्य

प्रस्तावित शहरों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी कनेक्टिविटी होगी। योजना के तहत एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड रेल, क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) और अन्य आधुनिक परिवहन साधनों के जरिए दिल्ली और इन शहरों के बीच यात्रा समय को लगभग 30 मिनट तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया गया है।

अगले 15 वर्षों में 3 करोड़ अतिरिक्त आबादी की तैयारी

दिल्ली-एनसीआर की आबादी लगातार तेजी से बढ़ रही है और भविष्य में यह दबाव और अधिक बढ़ने वाला है। एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2030 तक दिल्ली-एनसीआर दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले महानगरीय क्षेत्र Tokyo को भी पीछे छोड़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने दीर्घकालिक विकास रणनीति तैयार की है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने अनुमान लगाया है कि अगले 15 वर्षों में क्षेत्र में करीब 3 करोड़ अतिरिक्त लोगों के लिए आवास, रोजगार, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता होगी। इसे ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर शहरी ढांचे के विस्तार और नए विकास केंद्रों के निर्माण पर जोर दिया गया है। योजना के तहत दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के क्षेत्रों में 5 से 8 नई ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित की जाएंगी। इन शहरों को आधुनिक नागरिक सुविधाओं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार केंद्रों और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से लैस किया जाएगा।

एक्सप्रेसवे और रेल कॉरिडोर के किनारे बसेंगे आत्मनिर्भर शहर

रीजनल प्लान-2041 के मसौदे में यह भी सुझाव दिया गया है कि एनसीआर से जुड़े राज्य मौजूदा और प्रस्तावित एक्सप्रेसवे, रेल कॉरिडोर तथा प्रमुख परिवहन मार्गों के किनारे नई स्मार्ट टाउनशिप विकसित कर सकते हैं। इन टाउनशिप को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वे अपनी अधिकांश जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर हों और लोगों को रोजगार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सुविधाएं एक ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें।

योजना में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना का उदाहरण भी दिया गया है। इसके तहत Yamuna Expressway Industrial Development Authority क्षेत्र को एक विशाल ग्रीनफील्ड सिटी के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इस प्रस्तावित शहर की आबादी करीब 20 लाख होने का अनुमान है। माना जा रहा है कि औद्योगिक गतिविधियों, लॉजिस्टिक्स, शिक्षा और आधुनिक शहरी सुविधाओं के कारण यह क्षेत्र भविष्य में एनसीआर के प्रमुख विकास केंद्रों में शामिल हो सकता है।

इसी तरह हरियाणा सरकार भी Kundli-Manesar-Palwal Expressway के किनारे ‘पंचग्राम’ विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली के आसपास नए आर्थिक और आवासीय केंद्र तैयार करना है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।

एनसीआर प्लानिंग बोर्ड का मानना है कि एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड परिवहन नेटवर्क के आसपास नियोजित शहरी विकास से न केवल बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे। इससे दिल्ली-एनसीआर का विकास एक बहु-केंद्रित (Multi-Centric) मॉडल की ओर बढ़ेगा, जहां आर्थिक गतिविधियां केवल दिल्ली तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में फैल सकेंगी।

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