NEET Paper Leak Rajasthan: जयपुर और राजस्थान की राजनीति में इस वक्त नीट (NEET 2026) पेपर लीक मामले ने भारी बवाल मचा रखा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक हमले के बाद शुरू हुई ये जंग अब फोटो और सबूतों तक पहुंच गई है। मामला आरोपी दिनेश बिंवाल का है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी तीर चल रहे हैं।

भाजपा बैकफुट पर?

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बुधवार को सीधे सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि पकड़ा गया आरोपी दिनेश बिंवाल कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि बीजेपी का नेता है। गहलोत यहीं नहीं रुके, उन्होंने यहां तक कह दिया कि दिनेश के परिवार के 5 लोग पहले से सरकारी नौकरी में हैं। उन्होंने एसओजी (SOG) की कार्रवाई पर उंगली उठाते हुए पूछा कि अभी तक बड़े नामों पर एफआईआर क्यों नहीं हुई?

गहलोत के इस वार ने राजस्थान की सियासत में गर्मी बढ़ा दी है। उनके मुताबिक, कांग्रेस सरकार को बदनाम करने वाली भाजपा अब खुद के नेताओं को बचाने में लगी है।

फोटो खिंचवाने से कोई नेता नहीं बनता

गहलोत के आरोपों पर देर शाम भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने मोर्चा संभाला। उन्होंने इन बातों को सिरे से खारिज कर दिया। राठौड़ ने कहा कि गहलोत साहब को गलत जानकारी दी गई है। दिनेश बिंवाल पार्टी का कार्यकर्ता नहीं है। भाजपा की तरफ से तर्क दिया गया कि सार्वजनिक जीवन में लोग चलते-फिरते फोटो खिंचवा लेते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि वह पार्टी का पदाधिकारी हो गया।

विधायक जी तो भाई बता रहे हैं

विवाद तब और गहरा गया जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मैदान में एंट्री मारी। जूली ने भाजपा के दावों की हवा निकालने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। उन्होंने भाजपा विधायक महेंद्र पाल मीणा के पुराने पोस्ट के स्क्रीनशॉट शेयर कर दिए।

इन पोस्ट में विधायक ने आरोपी दिनेश बिंवाल को भाई कहकर बधाई दी है। जूली ने दावा किया कि दिनेश भाजयुमो (जयपुर देहात) का जिला मंत्री है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को कम से कम सफेद झूठ तो नहीं बोलना चाहिए।

अब देखना यह है कि पेपर लीक की यह जांच दिनेश बिंवाल के बहाने और किन बड़े चेहरों तक पहुंचती है। फिलहाल राजस्थान की जनता इस सियासी खींचतान के बीच असली गुनहगारों की गिरफ्तारी का इंतजार कर रही है।

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