भिलाईनगर। पीलिया प्रभावित क्षेत्र बीएसपी टाउनशिप के वार्ड 67 में नलों में गंदा पानी आ रहा है। आधा दर्जन सैम्पल लेकर पानी की जांच की गई तो उनमें बैक्टीरिया मिला। पानी में ई-कोलीफॉर्म और एच 2 एस बैक्टीरिया मिलने यह पानी पीने लायक नहीं पाया गया। आशंका जताई गई है कि पानी के पाइप लाइन में कहीं पर लीकेज है।
ज्ञात हो कि वार्ड 67 में कुछ अर्से पहले पीलिया के मरीज मिले थे। इसके बाद दोबारा मरीज पाए गए। इस पर संबंधित क्षेत्र से पानी का सैम्पल लेकर केमिस्ट से जांच कराई गई। जांच से पुष्टि हो गई कि पानी में बैक्टीरिया है जिसके चलते यह पीने योग्य नहीं है। उप अभियंता जलकार्य, नगर पालिक निगम भिलाई जोन आयुक्त जोन-5 को रिपोर्ट भेजी है।

केमिस्ट की रिपोर्ट में सभी जगह बीएसपी पाइप लाइन और एक जगह पावर पंप के पानी में बैक्टीरिया मिला। पाइप लाइन का लीकेज, परीक्षण कर संधारण पश्चात् पुनः परीक्षण किया जाना है। सीवर लाइन या गंदगी का पानी, पीने के पानी की लाइन में मिक्स हो रहा है।
कोलिहापुरी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई बना दुर्ग जिले का प्रथम मटेरियल रिकवरी सेंटर
दुर्ग। जनपद पंचायत दुर्ग द्वारा ग्राम पंचायत कोलिहापुरी में स्थापित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई को अब जिले के प्रथम आधिकारिक मटेरियल रिकवरी सेंटर (एमआरसी) के रूप में विकसित किया गया है। यह केंद्र न केवल कचरा निपटान का एक केंद्र है, बल्कि यह आत्मनिर्भर ग्राम स्वराज की दिशा में एक सशक्त कदम है।
इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि कोलिहापुरी एमआरसी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में वेस्ट टू वेल्थ ( कचरे से कमाई ) के मॉडल को मूर्त रूप देना है। यह केंद्र इस बात का प्रमाण है कि यदि सही तकनीकी मार्गदर्शन और सामुदायिक भागीदारी हो, तो ग्रामीण कचरा प्रबंधन को एक लाभदायक उद्यम में बदला जा सकता है। हम इस मॉडल को पूरे जिले के लिए एक मानक ( बेंचमार्क) के रूप में देख रहे हैं।
वैज्ञानिक पद्धति से कचरे का रिसाइकल
जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग दुबे ने बताया कि कोलिहापुरी एमआरसी को जिले के स्वच्छता अभियान का नोडल सेंटर बनाया गया है। इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार करते हुए दुर्ग जनपद के सभी 81 ग्रामों, धमधा के ग्राम लिटिया और पाटन के ग्राम पतोरा की इकाइयों को इस केंद्र से लिंकेज प्रदान की गई है। इस एकीकृत तंत्र के माध्यम से जिले के कुल 381 गांवों में उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर उसे वैज्ञानिक पद्धति से रिसाइकल किया जा रहा है।
हर माह 15 हजार रुपए की आमदनी
प्रतिदिन 150 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को आधुनिक मशीनों के जरिए प्रोसेस किया जा रहा है। प्लास्टिक को पिघलाकर उससे लम्स (लम्प्स) तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में भारी मांग है। इन लम्स को 20 से 25 रुपये प्रति किलो की दर से बड़ी निर्माण कंपनियों को बेचा जा रहा है। पिछले छह महीनों में सभी परिचालन खर्चों, बिजली शुल्क, मशीनों के रखरखाव और श्रमिकों के मानदेय का भुगतान करने के पश्चात इकाई प्रतिमाह लगभग 15,000 रुपये का शुद्ध लाभांश अर्जित कर रही है।
स्थानीय लोगों के लिए खुले रोजगार के द्वार
इस परियोजना ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोले हैं। एएस पॉलिमर के साथ हुए एमओयू के तहत स्थानीय निवासियों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया गया है। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें मनरेगा दरों के समान साप्ताहिक मजदूरी और बीमा कवरेज प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त, इस मॉडल का सामाजिक पहलू अत्यंत सराहनीय है। 5 प्रतिशत लाभ ग्राम पंचायत को सामाजिक कल्याण गतिविधियों के लिए, 5 प्रतिशत लाभ स्थानीय शिव शक्ति स्व- सहायता समूह को सशक्तिकरण हेतु दिया गया है।
गीले और सूखे कचरे का संस्थानों को खुद करना होगा निपटान
दुर्ग। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत भारत सरकार एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लागू किए गए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत नगर निगम क्षेत्र के सभी थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
आयुक्त सुमित अग्रवाल ने बताया कि जिन संस्थानों व प्रतिष्ठानों एवं अन्य बड़े परिसरों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है, उन्हें अपने परिसर में उत्पन्न गीले (जैविक) कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण एवं निपटान स्वयं परिसर के भीतर ही करना होगा।
तकिया पारा में 10 दिवसीय तकरीर का होगा आयोजन
दुर्ग। शहर के वार्ड 8 स्थित तकियापारा ईदगाह मैदान में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 10 दिवसीय तकरीर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें इस वर्ष मौलाना कासिम कानपुरी कानपुर से आ रहे है। जो 10 दिन 1 मोहर्रम से 10 मोहर्रम तक तकरीर करेंगे, और साथ की साथ पैगम्बर साहब के वंशज पीर सैय्यद जामी अशरफ साहब किछोछा शरीफ (उ प्र) से तशरीफ ला रहे है जो 8 मोहर्रम से 10 मोहर्रम तक अपना प्रवचन प्रस्तुत करेंगे।
अंजुमन के जुनैद आजमी ने बताया कि कार्यक्रम का 65वाँ वर्ष है। इस साल कार्यक्रम 17 जून को शाम बाद नमाज मगरिब परचम कुशाई किया जायेगा। 18 जून गुरुवार से 26 शुक्रवार तक प्रवचन का आयोजन होगा, साथ की साथ पैगम्बर साहब के वंशज सरकार जामी मिया भी काफी सालों बाद दुर्ग शहर में तशरीफ ला रहे हैं। कार्यक्रम का खास उद्देश्य समाज में प्रेम, सौहार्द, एकता और नैतिक मूल्यों बढावा देना है।
प्रतिदिन आयोजित होने वाली तकरीरों में धर्मगुरूओं एवं विद्वानों द्वारा लोगों को मानवता, सद्भावना शिक्षा के महत्व तथा सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने का संदेश दिया जाएगा। और हजरत ईमाम हसन, ईमाम हुसैन साहब की जीवनी पर प्रकाश डालेंगे। प्रोग्राम तकियापारा ईदगाह मैदान में रात्रि 10 बजे से शुरू हो जायेगा और साथ की साथ महिलाओं के लिए अलग से बैठने का इंतेजाम किया गया है।
डॉ. आकाश बक्शी जिला अस्पताल में निःशुल्क सेवाएं देंगे
दुर्ग। सुप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आकाश बक्शी जिला चिकित्सालय में निःशुल्क सेवाएं प्रदान करेंगे। जिला चिकित्सालय जहां 500 बेड और 1000 प्लस मरीजों की ओपीडी है, अब हृदय रोग विभाग रूम नंबर 17 में संचालित होगी जहां सुप्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आकाश बक्शी माह के प्रत्येक शुक्रवार को 10 बजे से 1 बजे तक निः शुल्क परीक्षण एवं मार्गदर्शन सेवाएं प्रदान करेंगे। 12 जून से इनकी सेवा प्रारंभ हुई है।
इस अवसर पर जिला चिकित्सालय सिविल सर्जन डॉ. एके मिंज, जीवन दीप समिति के आजीवन सदस्य दिलीप ठाकुर, आजीवन सदस्य सतीश सुराना, छग के स्वास्थ्य विभाग के दुर्ग संभागीय अध्यक्ष अजय नायक एवं ओम सत्यम शिक्षण एवं जन विकास समिति अध्यक्ष सीता राम ठाकुर की उपस्थिति थी ।
ट्रोवॉल निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत
उतई। ग्राम खम्हरिया (धनोरा) में रोजगार गारंटी से कोड़िया खार राजपूत तालाब के पास 16 लाख रुपये की लागत से ट्रोवाल का निर्माण किया जा रहा है। शुरुआत से ही कार्य में भारी अनियमितता देखी जा रही है। स्टाप डेम से ट्रोवॉल की ऊंचाई दो फीट ऊँचा बनाना था, लेकिन उसे अनियमितता के चलते दो फीट नीचे बनाया जा रहा है।
पिछले वर्ष ट्रोवाल नहीं होने के कारण पूरी सड़क बह गयी थी। इसके कारण किसानों एवं शासन को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। वर्तमान में वहीं गलती दोहराई जा रही है। बारिस के महीने में फिर सड़क बह जायेगी। किसानों को फिर कठिनाईयों का समाना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने अधिकारियों को डेम को दिखाया था । इसकी समस्या के बारे में विस्तार से बताया गया। गांव वालों द्वारा जनपद पंचायत के इंजीनियर को बुलाकर इस समस्या की जानकारी दी थी। गांव वालों की बातों को अनदेखा करते टाल दिया है।
तीन साल में भी नहीं बन पाया रेल्वे अंडरब्रिज
राजनांदगांव। रेलवे स्टेशन से लगे स्टेशन पारा क्षेत्र में लंबे समय से बनाया जा रहा अंडर ब्रिज का कार्य आज पर्यंत पूर्ण नहीं हो पाया है जब इहके लिए समय-समय पर विरोध प्रदर्शन भी किया जा रहा है फिर भी स्थिति जस की तस देखने को मिल रही है। पूर्व के दिनों में मांग को लेकर कांग्रेसियों ने हल्ला बोल था। अभी भी कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नागपुर के अंतर्गत आने वाले राजनांदगांव रेलवे स्टेशन से लगे कुछ दूरी पर लंबे समय से स्टेशन पारा क्रॉसिंग के पास और गौरी नगर रेलवे क्रॉसिंग के पास अंडर ब्रिज का निर्माण कार्य किया जा रहा है। 3 साल बाद भी आधा अधूरा निर्माण कार्य होने के कारण पटरी पार क्षेत्र के रहवासियों को आने-जाने में काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही है।
खास बात यह है कि अंडर ब्रिज का निर्माण पूर्ण नहीं होने के कारण पटरी पार क्षेत्र के अंतर्गत आने स्टेशन पार से लेकर शंकरपुर चिखली, शांति नगर, गौरी नगर के साथ-साथ मोतीपुर, नवागांव, नया और पुराना ढाबा सहित आसपास में लगे गांव के रहवासी खैरागढ़ मार्ग में बनाए गए ओवरब्रिज से ही आना-जाना कर रहे हैं। जिसमें भारी वाहनों का दबाव अधिक होने के कारण आने-जाने में काफी दिक्कतें भी उठानी पड़ रही हैं। ऐसे में समय-समय पर अंडर ब्रिज का निर्माण कार्य पूर्ण कराने की मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार प्रदर्शन भी किया जा रहा है, उसके बाद भी निर्माण कार्य में तेजी नहीं आ पा रही है।
29 करोड़ की लागत से बनने वाले नहर लाइनिंग के कार्य में लीपापोती
डोंगरगांव। राजनांदगांव नगर की प्यास बुझाने वाले क्षेत्र सहित बालोद जिले के ग्रामों के किसानों को सिंचाई सुविधा देने वाले मटिया मोती नाला केनाल लाईनिंग कार्य में प्रारंभ से ही भर्राशाही दिखाई दे रही है। स्थिति यह है कि निर्माण के साथ ही कांक्रीटीकरण के कार्य में अनेक स्थानों पर दरारें और हनीकोम साफ दिख रही है।
वहीं अर्थवर्क को लेकर भी क्षेत्रवासियों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है. क्षेत्र के बहुप्रतिक्षित इस निर्माण कार्य की वर्षों से दरकार थी. वर्ष 1984 में पूर्ण होकर लोकार्पित हुए इस नहर का लाभ राजनांदगांव नगर निगम सहित क्षेत्रवासियों को इसका लाभ मिलते आ रहा था।
लगभग 18 किलोमीटर से अधिक इसके केनाल को निर्माण कार्य के दौरान ही पक्का सीमेंटीकरण किया गया था, जिसके अनेक स्थानों पर टूटफूट व दरारों के चलते अनेक स्थानों पर रिसाव और पानी के अनावश्यक बहने की समस्या के समाधान के लिए शासन स्तर पर लगभग 28.75 करोड़ की लागत से यह कार्य किया जा रहा है, जिसमें संबंधित ठेकेदार व्दारा शुरूआत से ही गुणवत्ताहीन कार्य किये जाने की शिकायतें आ रही है।
अतिथि प्राध्यापकों के भरोसे शासकीय महाविद्यालय
राजनांदगांव। राजनांदगांव जिले के महाविद्यालय में अभी भी स्थाई प्राध्यापकों की कमी बनी हुई है। अतिथि प्राध्यापकों के भरोसे ही महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। जिसका असर महाविद्यालय के परीक्षा परिणामों पर भी देखने को मिल रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जिले में कुल 25 शासकीय महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। इन महाविद्यालयों में नई शिक्षा नीति के तहत बीकॉम, बीएससी, बीएचएससी, बीबीए बीसीए, पीजीडीसीए, सहित अन्य रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। राजनांदगांव जिला मुख्यालय में जिले का एकमात्र स्वशासीय दिग्विजय महाविद्यालय का संचालन होता है। इस महाविद्यालय में 6000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। सेटअप के आधार पर यहां पर 94 प्राध्यापकों की पद स्थापना होनी चाहिए थी, लेकिन उसका पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है। यहां पर भी जन भागीदारी समिति के माध्यम से प्रतिवर्ष अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्तियां सुनिश्चित कराई जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यहां पर 42 से अधिक पद रिक्त हैं। हिंदी अंग्रेजी से लेकर विज्ञान वाणिज्य, कला संकाय में अधिक से अधिक प्राध्यापकों के पद रिक्त होने के कारण प्रतिवर्ष अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्तियां होती हैं। ऐसे में अध्ययन अध्यापन का कार्य प्रभावित हो रहा है।
एकमात्र महिला महाविद्यालय में भी प्राध्यापकों की कमी
राजनांदगांव जिला मुख्यालय में कमला देवी महिला महाविद्यालय का भी संचालन हो रहा है। महाविद्यालय में जिले भर की छात्राएं अध्ययन करती हैं। महाविद्यालय में विज्ञान और वाणिज्य संकाय के साथ-साथ कला संकाय की कक्षाओं का भी संचालन हो रहा है स्नातक और स्नातकोत्तर की कक्षाएं संचालित होने के बाद भी यहां पर भी प्राध्यापकों की कमी बनी हुई है । महाविद्यालय प्रबंधन से मिली जानकारी के मुताबिक महाविद्यालय में कुल 27 जिसमें से 14 पद अभी भी खाली है। इन प्राध्यापकों के पद स्वीकृत है। पदों पर प्रतिवर्ष अतिथि प्राध्यापकों की नियुक्तियां सुनिश्चित कराई जा रही है।
इस वर्ष 1,69,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में होगी धान की बोनी
राजनांदगांव। खरीफ वर्ष 2026 में कृषि विभाग द्वारा धान बोनी से लेकर दलहन-तिलहन की बोनी का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। कृषि विभाग के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राजनांदगांव जिले में इस वर्ष खरीफ वर्ष 2026 में खरीफ का लक्ष्य कुल 1,83,643.005 हेक्टेयर क्षेत्रफल निर्धारित किया गया है, जोकि गत वर्ष की अपेक्षा 300 हेक्टर क्षेत्रफल से अधिक बताया जा रहा है।
प्री मानसून की दस्तक के साथ किसान भी खेती किसानी कार्यों में जुट गए हैं। दलहन तिलहन के साथ-साथ कपास, गन्ना और साग सब्जी के लिए भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उसी के आधार पर बोनी कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। राजनांदगांव जिले में अभी भी मानसून पर आधारित अधिक से अधिक खेती किसानी का कार्य सुनिश्चित कराया जाता है। खरीफ वर्ष 2026 के लिए खरीफ बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया जा चुका है। और उसी के मुताबिक बोनी की तैयारी शुरू कराई जाएगी ।
कृषि विभाग के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक राजनांदगांव जिले में खरीफ वर्ष 2026 के दौरान धान की बोनी 1,69,338 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सुनिश्चित की जाएगी। इसी प्रकार से दलहन के अंतर्गत अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी की बोनी भी 2477 हेक्टेयर क्षेत्रफल में करने का लक्ष्य रखा गया है। तिलहन के अंतर्गत मूंगफली, तिल, सोयाबीन सूर्यमुखी, रामतिल आदि की बोनी कराई जाती है। जिसका लक्ष्य भी 4402 हेक्टेयर क्षेत्रफल बताया जा रहा है।
अन्य फसलों के अंतर्गत कपास, गाना, साग-सब्जी के साथ अन्य फसले भी बोई जाती है, जिसका लक्ष्य भी 4 462.405 हेक्टेयर क्षेत्रफल निर्धारित कर दिया गया है। इस प्रकार से कुल 1,83,643.005 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ फसल की बोनी सुनिश्चित कराई जाएगी। इसके लिए कृषि विभाग द्वारा जिले के सभी विकासखंडों में अधिकारी और कर्मचारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई है।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के छह सौ पद खाली
राजनांदगांव। जिले के प्राथमिक, मिडिल, हाई व हायर सेकंड्री स्कूल में छह सौ पदों में शिक्षको की भर्ती नही होने के कारण पद लंबे समय से खाली है। जिले में करीब 1336 स्कूलों में छह सौ शिक्षकों की कमी बनी हुई है। जिसके कारण स्कूलों में हर साल पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्रदेश स्तर पर जिले के बच्चे खास प्रदर्शन करने व टाप टेन की सूची में आने प्रयास कर रहे है। लेकिन मिली जानकारी अनुसार जिले में लंबे शिक्षको कमी भी बड़ा कारण बन रहा है। समय से शिक्षको की कमी बनी हुई है। जिसमें सबसे ज्यादा सहायक शिक्षक की कमी है। वहीं प्राचार्य, व्याख्याता, व्यायाम शिक्षक, प्रधान पाठक, ग्रंथपाल जैसे पद में शिक्षको की लंबे समय से कमी बनी हुई है। हर साल इन पदों की भर्ती नही होने के कारण स्कूलो में पढ़ाई प्रभावित होती है।
अफसरों का कहना है कि राज्य शासन को खाली पदों को भरने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया जाता है। लेकिन शासन स्तर पर स्कूलों के रिक्त पदों में शिक्षको की भर्ती नही किए जाने के कारण शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित होती है।
जिले में 102 ट्यूटर करा रहे पढ़ाई
स्कूलों के रिक्त पदों को नही भरे जाने के कारण जिला प्रशासन द्वारा थी। प्रदेश के कई जिलो में डीएमएफ फंड से ट्यूटरों की भर्ती की गई से जा रहा है। हालांकि, शिक्षा विभाग का कहना संचालित सेजेस स्कूलों को बंद किया है कि जिले में डीएफएफ फंड से स्कूलों का संचालन नही हो रहा है। लेकिन ऐसे 102 टूयूटरों की भर्ती स्कूलो में पढ़ाई कराने के लिए की गई है। जिसका भुगतान डीएमएफ फंड से हो रहा हैं। प्राथमिक स्कूल में तीन और मिडिल में इन्हें चार हजार रुपए तक का भुगतान किया जा रहा था।
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