नूंह। सास-बहू के रिश्तों को लेकर अक्सर विवाद और खटास की खबरें सामने आती हैं, लेकिन हरियाणा के नूंह जिले से आई एक तस्वीर ने इस रिश्ते की खूबसूरत मिसाल पेश की है। यहां एक बहू ने अपनी 90 वर्षीय बुजुर्ग सास की धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए उन्हें सिर पर टोकरे में बैठाकर 84 कोस परिक्रमा पूरी कराई।
बुजुर्ग सास चंदरी चलने-फिरने में असमर्थ हैं, लेकिन उनकी परिक्रमा करने की इच्छा को पूरा करने के लिए बहू काजल चौधरी ने कठिन रास्तों और लंबी यात्रा की परवाह किए बिना यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई। पूरे सफर के दौरान वह सास की सेवा और देखभाल करती रहीं।
ग्रामीणों ने फूल बरसाकर किया स्वागत
जब परिक्रमा के दौरान वे बिछोर गांव पहुंचीं तो मुस्लिम समाज के लोगों ने भी इस अनूठी सेवा भावना को सलाम किया। गांव के पुरुषों और महिलाओं ने फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया और बहू काजल की जमकर सराहना की।
सास भी मां के समान होती है
काजल चौधरी ने बताया कि उन्होंने बंचारी गांव से परिक्रमा शुरू की थी। उनकी 90 वर्षीय सास चंदरी स्वयं चल नहीं सकतीं, इसलिए उन्होंने उन्हें सिर पर बैठाकर पूरी 84 कोस परिक्रमा कराई। काजल ने कहा, “सास भी मां के समान होती है, उनकी सेवा करना मेरा कर्तव्य है।”
बहू की इस सेवा, समर्पण और संस्कार की कहानी अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के लिए प्रेरणा का संदेश दे रही है।

