सत्य निकेतन (Satya Niketan) में बहुमंजिला हॉस्टल ढहने से 7 लोगों की मौत के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने दावा किया है कि उसने हादसे से करीब 3 महीने पहले ही इलाके की इमारतों में सुरक्षा संबंधी खतरों, खासकर आग लगने की आशंका को लेकर प्रशासन को आगाह किया था। इसके बावजूद पुलिस की चेतावनी पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई। पिछले रविवार को सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला हॉस्टल ढह गया था। हादसे में पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हुई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने इलाके की इमारतों की स्थिति और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर पहले ही चिंता जताई थी।

17 जून को भेजा था SDM को पत्र

हौज रानी अग्निकांड के करीब दो सप्ताह बाद, 17 जून को साउथ कैंपस थाने के एसएचओ ने महरौली के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को पत्र भेजा था। पत्र में सत्य निकेतन इलाके में जन-सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करने की सलाह दी गई थी। पुलिस ने इलाके की संवेदनशीलता को भी प्रशासन के सामने रखा था। सत्य निकेतन के आसपास करीब 13 कॉलेज हैं और यहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। ऐसे में असुरक्षित या मानकों के अनुरूप नहीं बनी इमारतों में छात्रों के रहने से किसी बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।

हौज रानी अग्निकांड के बाद भेजा था पत्र

यह चेतावनी हौज रानी इलाके में एक ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ में लगी आग की घटना की जांच के दौरान सामने आई थी। इस हादसे में 23 लोगों की मौत हुई थी। घटना के करीब दो सप्ताह बाद, 17 जून को साउथ कैंपस थाने के एसएचओ ने महरौली के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को पत्र भेजा था। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्र भेजे जाने की पुष्टि करते हुए इसे एक रूटीन पत्र बताया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्र उस विशेष इमारत के संबंध में नहीं था, जो बाद में ढह गई।

कई पीजी और कैफे में फायर सेफ्टी NOC नहीं

हालांकि, पत्र में सत्य निकेतन इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं दर्ज की गई थीं। पत्र के मुताबिक, इलाके में कई पेइंग गेस्ट (PG) अकोमोडेशन और कैफे बिना फायर सेफ्टी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और जरूरी अग्नि सुरक्षा उपायों के संचालित हो रहे थे। पत्र में इन कमियों को दूर करने के लिए संबंधित विभाग की ओर से निरीक्षण कराने की बात कही गई थी। ऐसे निरीक्षण के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से आवश्यक सहयोग देने की पेशकश भी की गई थी। पुलिस के पत्र में केवल फायर सेफ्टी ही नहीं, बल्कि जन सुरक्षा, स्वच्छता और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया था। पत्र के अंत में संबंधित अधिकारियों से मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था।

एसडीएम ने चिट्ठी मिलने से किया इनकार

महरौली के एसडीएम राहुल राठौड़ ने दिल्ली पुलिस की ओर से भेजी गई चिट्ठी मिलने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय को ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जताई कि पत्र कार्यालय में आया हो और आगे कार्रवाई के लिए दिल्ली नगर निगम को भेज दिया गया हो, क्योंकि मामले में कार्रवाई की जिम्मेदारी निगम की थी।दिल्ली नगर निगम से भी इस चिट्ठी को लेकर सवाल किए गए, लेकिन निगम की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।

हौज रानी अग्निकांड के बाद बनी थीं 13 जिला स्तरीय कमेटियां

सत्य निकेतन में सुरक्षा संबंधी चिंताओं का मामला हौज रानी में हुए अग्निकांड के बाद सामने आया था। हौज रानी में एक ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ में आग लगने से 23 लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद सरकार ने निरीक्षण और कार्रवाई के लिए 13 जिला-स्तरीय कमेटियों का गठन किया था। इन कमेटियों में दिल्ली नगर निगम समेत विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारी शामिल थे। इसी दौरान 17 जून को साउथ कैंपस थाने के एसएचओ ने महरौली के एसडीएम को पत्र भेजकर सत्य निकेतन में जन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जल्द कार्रवाई का अनुरोध किया था। पत्र में इलाके में कई पीजी और कैफे के बिना फायर सेफ्टी एनओसी और जरूरी अग्नि सुरक्षा उपायों के संचालन का उल्लेख था।

हादसे के बाद 20 और इमारतों में नहीं मिली फायर एनओसी

सत्य निकेतन में हॉस्टल हादसे के बाद किए गए शुरुआती सर्वे में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति और भी चिंताजनक सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, सत्य निकेतन और मोती बाग इलाके में कम से कम 20 ऐसी बहुमंजिला इमारतें मिलीं, जिन्हें फायर एनओसी की जरूरत है, लेकिन उन्होंने इसके लिए कभी आवेदन ही नहीं किया था। इनमें से ज्यादातर इमारतों का इस्तेमाल छात्रों के रहने के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में केवल तीन रेस्टोरेंट ऐसे मिले जिन्हें दिल्ली फायर सर्विस (DFS) से मंजूरी मिली हुई थी।

किन इमारतों के लिए जरूरी है फायर एनओसी?

दिल्ली फायर सर्विस के नियमों के मुताबिक, 17.5 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों, 50 से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता वाले रेस्टोरेंट और कुछ अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए फायर एनओसी लेना जरूरी है। जानकारों के मुताबिक, किसी इमारत के पास फायर सेफ्टी की मंजूरी नहीं होना केवल अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं हो सकता। कई मामलों में इसका संबंध भवन निर्माण, उपयोग और अन्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन से भी हो सकता है।

करीब 50 साल पुरानी इमारत में चार मंजिलें बढ़ाने का आरोप

इमारत गिरने के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, बिल्डिंग में कई स्ट्रक्चरल कमियां थीं। हालांकि, एमसीडी का कहना है कि उसे इस इमारत के खिलाफ अवैध निर्माण से जुड़ा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। वहीं, पुलिस की एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि लालच के चलते इमारत के मालिक और उसके भाई ने करीब 50 साल पुरानी इमारत में चार अवैध मंजिलों का निर्माण कराया था। पुलिस के मुताबिक, उन्हें इस बात की जानकारी थी कि अतिरिक्त निर्माण से इमारत पर भार बढ़ सकता है और इसकी नींव पर असर पड़ सकता है।

दुकान के लिए दीवार हटाना बना हादसे की आखिरी वजह

जांच अधिकारियों के मुताबिक, हादसे वाले दिन ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से एक दीवार हटाई जा रही थी। अधिकारियों का कहना है कि इसी दीवार को हटाना इमारत गिरने की तत्काल वजह बना। इस काम के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इमारत के मालिक के बेटे महेश गुप्ता द्वारा नियुक्त लेबर कॉन्ट्रैक्टर ने जांचकर्ताओं को बताया कि घटना से करीब डेढ़ घंटे पहले एक प्लंबर मौके पर आया था। उसने दीवार नहीं तोड़ने की सलाह दी थी। अधिकारी के अनुसार, कॉन्ट्रैक्टर सनोज कुमार ने प्लंबर से कहा कि उसे यह काम मालिक के कहने पर करना है। इसके बाद दीवार तोड़ी गई और कुछ ही समय में पूरी इमारत ढह गई। मलबे में छात्र और मजदूर दब गए।

सात लोगों की मौत, 12 को बचाया गया

हादसे में डीयू के पांच छात्रों और दो मजदूरों की मौत हुई। करीब 28 घंटे तक चले राहत और बचाव अभियान के दौरान 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मामले की जांच के तहत अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला, उनके बेटे महेश गुप्ता, लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज कुमार और सुधांशु लवनीश शामिल हैं। सुधांशु ने शुभम त्यागी के साथ मिलकर गुप्ता परिवार से यह इमारत पीजी चलाने के लिए किराए पर ली थी।

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