हेमंत शर्मा, इंदौर। पीथमपुर निवेश क्षेत्र से सामने आया मामला सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिस जमीन पर उद्योग लगने थे, वहां कथित तौर पर आलीशान रिसॉर्ट खड़ा हो गया। इतना ही नहीं, MPIDC ने खुद अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया, सात दिन में निर्माण हटाने की चेतावनी भी दी, लेकिन सवाल यह है कि आखिर नोटिस के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? MPIDC (मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम) के आधिकारिक पत्र के अनुसार पीथमपुर निवेश क्षेत्र के स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप सेक्टर-7 में ग्राम सलमपुरा की खसरा नंबर 329/12 और 329/9 की करीब 1.777 हेक्टेयर भूमि पर बिना अनुमति निर्माण किए जाने का उल्लेख है।
तो फिर बुलडोजर क्यों नहीं चला
विभाग ने संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सात दिन के भीतर अवैध निर्माण हटाया जाए, अन्यथा MPIDC स्वयं कार्रवाई करेगा और पूरा खर्च संबंधित पक्ष से वसूलेगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहीं से शुरू होता है। यदि विभाग ने खुद अवैध निर्माण मान लिया था, तो फिर बुलडोजर क्यों नहीं चला? क्या सरकारी आदेश केवल फाइलों तक सीमित रह गया? या फिर किसी प्रभावशाली संरक्षण के कारण कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई? इस मामले को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इसी जमीन पर “नंदी हिल्स रिसॉर्ट” संचालित किया जा रहा था।
आरक्षित सरकारी जमीन ऐयाशी के अड्डे में कैसे बदल गई?
रिपोर्टों में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि यहां युवाओं की पार्टियां होती थीं और अनैतिक गतिविधियों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल अवैध निर्माण का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह सवाल भी उठेगा कि औद्योगिक विकास के लिए आरक्षित सरकारी जमीन आखिर कथित तौर पर रिसॉर्ट और अय्याशी के अड्डे में कैसे बदल गई? और यदि स्थानीय स्तर पर शिकायतें थीं, तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
नोटिस के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई
यह पूरा मामला MPIDC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। एक ओर विभाग अवैध निर्माण स्वीकार करते हुए नोटिस जारी करता है, दूसरी ओर कथित निर्माण लंबे समय तक बना रहता है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि क्या नियम आम लोगों के लिए अलग और रसूखदारों के लिए अलग हैं? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी? नोटिस जारी करने के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही? यदि निर्माण अवैध था तो उसे तत्काल क्यों नहीं हटाया गया, और यदि वैध था तो फिर नोटिस क्यों जारी किया गया? सरकारी जमीन, अवैध निर्माण, विभागीय नोटिस और कार्रवाई में देरी-इन सभी पहलुओं ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि MPIDC और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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