दिल्ली में वाहन नीति को लेकर एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है, जो आने वाले वर्षों में राजधानी की सड़कों पर परिवहन की तस्वीर बदल सकता है। अगर नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू होती है, तो 2028 के बाद रजिस्टर होने वाले नए वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की हिस्सेदारी 65% से अधिक हो सकती है। सरकार का उद्देश्य इस नीति के जरिए राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को कम करना, ईंधन पर निर्भरता घटाना और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है। भारत सरकार और राज्य स्तर पर इस दिशा में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत EV खरीद पर सब्सिडी, चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क का विस्तार और वाहनों के इलेक्ट्रिफिकेशन को बढ़ावा देने की योजना शामिल है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कुछ स्तरों पर असहमति भी सामने आ रही है। उद्योग से जुड़े कुछ वर्गों का मानना है कि इतने बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी सप्लाई और लागत जैसे मुद्दों पर और तैयारी की जरूरत होगी।

2028 से सिर्फ इलेक्ट्रिक बाइक का रजिस्ट्रेशन

दिल्ली में प्रस्तावित नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लेकर बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। मसौदे के अनुसार, जनवरी 2028 से राजधानी में नई पेट्रोल बाइक का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इस कदम का सीधा असर यह होगा कि हर साल नई रजिस्टर होने वाली दोपहिया गाड़ियों में 60 से 65 प्रतिशत तक हिस्सा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का हो सकता है। नीति का मकसद प्रदूषण कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर आम जनता, वाहन उद्योग और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां ले रही है। हालांकि, पेट्रोल बाइक पर संभावित रोक को लेकर कई लोगों ने चिंता भी जताई है खासकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कीमत और उपयोग की सुविधा को लेकर।

सरकारी आकलन के अनुसार राजधानी के कुल प्रदूषण में वाहनों का योगदान करीब 25 से 30 प्रतिशत तक है। इसी में टू-व्हीलर्स यानी बाइक और स्कूटर की हिस्सेदारी लगभग 15 से 18 प्रतिशत आंकी गई है। इसी वजह से नई ईवी नीति में सबसे ज्यादा जोर इन्हीं वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर दिया गया है।प्रस्तावित नीति के अनुसार, जनवरी 2028 से नई पेट्रोल बाइक का रजिस्ट्रेशन बंद किया जा सकता है। इसका मतलब होगा कि उस समय के बाद सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री और पंजीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि 2028 से पहले खरीदी गई पेट्रोल बाइक पहले की तरह सड़कों पर चलती रहेंगी और उन पर किसी तरह की रोक नहीं लगेगी। सरकार का मानना है कि अगर टू-व्हीलर सेक्टर को तेजी से इलेक्ट्रिक में बदला जाए तो प्रदूषण में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है। क्योंकि यह सेगमेंट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला वाहन वर्ग है।

दिल्ली में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे सड़क परिवहन और प्रदूषण पर दबाव भी बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार राजधानी में कुल 87 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें करीब 59 लाख टू-व्हीलर्स शामिल हैं, जो कुल वाहनों का बड़ा हिस्सा हैं। पिछले दो वर्षों में ही शहर में 10 लाख से ज्यादा नए टू-व्हीलर्स जुड़े हैं, जिससे सड़कों पर वाहनों का दबाव और बढ़ गया है। राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं, लेकिन उनकी हिस्सेदारी अभी भी सीमित है। फिलहाल लगभग 4.7 लाख इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) रजिस्टर्ड हैं, लेकिन नए टू-व्हीलर्स में EV की हिस्सेदारी सिर्फ करीब 6.75% है। निजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है टू-व्हीलर्स सबसे बड़ा हिस्सा बने हुए हैं EV की ग्रोथ हो रही है, लेकिन गति अपेक्षाकृत धीमी है.

EV वाहनों से खर्च में कमी और पर्यावरण को राहत

इसी क्रम में परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स अपनाने से आम लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा। मंत्री के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों से लोगों को दोहरा लाभ होगा पहला, ईंधन खर्च में भारी कमी और दूसरा, प्रदूषण में गिरावट। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर एक किफायती विकल्प बनकर उभर रहे हैं, जिससे आम जनता को आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी आने से पर्यावरण को भी फायदा होगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाया जाए, खासकर दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में, जहां इनका उपयोग सबसे अधिक होता है।

EV नीति पर जनता से मांगे गए सुझाव, 10 मई तक मौका

दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इस मसौदे पर आम लोगों से 10 मई तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में फिलहाल करीब 4.71 लाख इलेक्ट्रिक वाहन हैं, जिनमें ई-रिक्शा, ई-ऑटो, इलेक्ट्रिक कारें, बसें और बाइक शामिल हैं।

नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर सब्सिडी देने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही चरणबद्ध तरीके से ई-ऑटो, ई-बाइक और स्कूल बसों को भी इलेक्ट्रिक मोड में बदलने की योजना बनाई गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण को कम करना और राजधानी को स्वच्छ परिवहन व्यवस्था की ओर ले जाना है। सरकार का मानना है कि यह कदम न सिर्फ दिल्ली के लिए, बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।

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