दिल्ली सरकार ने राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक बड़ा और वैज्ञानिक आधार वाला कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत IIT दिल्ली के नेतृत्व में एक एडवांस्ड और रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी कराई जाएगी, जिससे प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की सटीक पहचान की जा सकेगी। बुधवार को दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder Singh Sirsa) की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में Indian Institute of Technology Delhi (IIT दिल्ली) के वैज्ञानिकों की टीम ने एक विस्तृत योजना प्रस्तुत की, जिसमें दिल्ली के एयर क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने के लिए साइंस-बेस्ड रोडमैप दिया गया।
प्रस्तावित अध्ययन के तहत शहर में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों जैसे वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियां, धूल और अन्य कारणों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि नीति निर्माण केवल अनुमान पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक डेटा के आधार पर किया जाए। यह प्रस्ताव पिछली सरकार के कार्यकाल में लंबे समय तक लंबित रहा और बाद में फाइलों में अटका रह गया था। अब इसे दोबारा सक्रिय करते हुए IIT दिल्ली के नेतृत्व में एडवांस्ड रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी को आगे बढ़ाने की तैयारी है। इस दिशा में हाल ही में दिल्ली के पर्यावरण विभाग, Delhi Pollution Control Committee (DPCC) और IIT दिल्ली के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
जानकारी के अनुसार, IITM पहले से ही PM2.5 से जुड़े अध्ययन पर काम कर रहा है, जबकि एक्शन प्लान के तहत PM10 पर भी विशेष फोकस करने का लक्ष्य रखा गया था। इसी क्रम में इस नई स्टडी को दिल्ली की एयर क्वालिटी मैनेजमेंट रणनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है। बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम पहचान कर नीति निर्माण को और अधिक वैज्ञानिक बनाया जाएगा, ताकि ठोस और लक्षित कदम उठाए जा सकें।
DPCC सुपर-साइट को फिर से होगी चालू
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक 5 साल की विस्तृत और तकनीकी रूप से उन्नत अध्ययन परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया है। इस स्टडी का मुख्य उद्देश्य पुराने डेटा आधारित विश्लेषण से आगे बढ़कर प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम पहचान करना है, खासकर PM10 स्तर पर विशेष फोकस के साथ। इस पहल का लक्ष्य नीति निर्माताओं को ऐसे डेटा उपलब्ध कराना है, जिससे वे पीक पॉल्यूशन के दौरान तुरंत निर्णय ले सकें और लंबे समय में प्रभावी नियंत्रण रणनीतियों का आकलन कर सकें।
इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता Delhi Pollution Control Committee (DPCC) की सुपर-साइट को फिर से सक्रिय करना है। इस साइट को एडवांस्ड मॉनिटरिंग उपकरणों और मोबाइल यूनिट्स के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे पूरे शहर में प्रदूषण का हाई-रिजोल्यूशन और लगातार अपडेट होने वाला डेटा मिल सकेगा। इसके साथ ही यह सिस्टम एक ऐसा एकीकृत प्लेटफॉर्म तैयार करेगा जो वैज्ञानिक आधार पर प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और विश्लेषण को और अधिक सटीक बनाएगा।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में एयर क्वालिटी सुधार दिल्ली सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित स्टडी सरकार को मजबूत वैज्ञानिक समर्थन देगी, जिससे नीति निर्माण और अधिक प्रभावी हो सकेगा। मंत्री के अनुसार, इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि प्रदूषण के मुख्य स्रोत कौन से हैं, किन कारणों से यह बढ़ता है और कौन से कदम जमीनी स्तर पर वास्तविक असर दिखा रहे हैं।
स्टडी की प्रमुख विशेषताएं
योजना के तहत कई प्रमुख वैज्ञानिक और मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल किए गए हैं.
रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट
ऑनलाइन सैंपलिंग सिस्टम के जरिए प्रदूषण के स्रोतों की लगातार पहचान की जाएगी, जिससे पीक पॉल्यूशन के समय तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
हॉटस्पॉट मॉनिटरिंग
मोबाइल वैन के माध्यम से शहर के प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट्स की निगरानी की जाएगी, ताकि सभी संवेदनशील क्षेत्रों को कवर किया जा सके।
24×7 सुपर-साइट ऑपरेशन
लगातार डेटा कलेक्शन के जरिए बेसलाइन और सीजनल ट्रेंड्स का विश्लेषण किया जाएगा, जिससे प्रदूषण के पैटर्न को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन
इसमें सीलोमीटर, GHG एनालाइज़र और मल्टी-चैनल सैंपलर्स जैसे उपकरणों का उपयोग होगा, जिससे मौसमीय प्रभाव और स्थानीय उत्सर्जन के प्रभाव को अलग-अलग करके समझा जा सके।
लाइव डैशबोर्ड और रिपोर्टिंग
Delhi Pollution Control Committee (DPCC) को रियल-टाइम डेटा फीड उपलब्ध कराया जाएगा, साथ ही साप्ताहिक अपडेट और मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएंगी।
एमिशन इन्वेंट्री अपडेट
दिल्ली के मौजूदा उत्सर्जन डेटा को अपडेट कर अधिक सटीक और वर्तमान स्थिति के अनुसार तैयार किया जाएगा।
अपविंड और डाउनविंड एनालिसिस
सोनीपत साइट और दिल्ली सुपर-साइट के जरिए क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों और उनके प्रभावों का विश्लेषण किया जाएगा।
क्लाइमेट को-बेनिफिट्स
स्वच्छ वायु के लिए उठाए गए उपायों का जलवायु परिवर्तन पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।
प्रोजेक्ट पांच साल में सभी प्रमुख हॉटस्पॉट्स को करेगा कवर
इस परियोजना के तहत DPCC के स्टाफ को आधुनिक तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें इंस्ट्रूमेंट ऑपरेशन, डेटा एनालिसिस, वायु गुणवत्ता मॉडलिंग और केमिकल कैरेक्टराइजेशन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक क्षमता को मजबूत करना है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण में बेहतर निर्णय लिए जा सकें।
स्टडी के दायरे में दिल्ली के सभी प्रमुख प्रदूषण हॉटस्पॉट्स को शामिल किया जाएगा। योजना के अनुसार, हर हॉटस्पॉट पर कम से कम 30 दिनों की सीजनल सैंपलिंग की जाएगी, ताकि विभिन्न मौसमों में प्रदूषण के स्तर और स्रोतों का सटीक आकलन किया जा सके। इसके साथ ही एक केंद्रीय सुपर-साइट पर 24×7 लगातार मॉनिटरिंग की व्यवस्था रहेगी, जिससे शहर भर के प्रदूषण पैटर्न का वास्तविक समय में विश्लेषण संभव होगा।
पॉल्यूशन स्रोतों की होगी सटीक पहचान
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल दिल्ली को प्रदूषण स्रोतों की सटीक पहचान, मौजूदा नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति तैयार करने के लिए एक मजबूत डेटा बेस उपलब्ध कराएगी। पर्यावरण मंत्री Manjinder Singh Sirsa ने कहा कि दिल्ली की प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई अब विज्ञान, डेटा और जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह स्टडी यह स्पष्ट करने में मदद करेगी कि प्रदूषण किन स्रोतों से आ रहा है और कौन से कदम वास्तव में जमीनी स्तर पर प्रभाव डाल रहे हैं। यह परियोजना रियल-टाइम मॉनिटरिंग, हॉटस्पॉट विश्लेषण और एडवांस्ड वैज्ञानिक उपकरणों के जरिए वायु गुणवत्ता का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके साथ ही नीति निर्माताओं को ऐसे डेटा उपलब्ध होंगे, जिनके आधार पर तेज और प्रभावी निर्णय लिए जा सकेंगे।
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