संजीव घनगस, सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच गुरुवार को एक बड़ा हादसा टल गया। खरखौदा ब्लॉक के गांव रोहट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की इमारत का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय अस्पताल में मौजूद मरीज और स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षित बाहर निकल चुके थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
दोपहर 3:20 बजे अचानक ढही गैलरी
जानकारी के अनुसार गुरुवार दोपहर करीब 3:20 बजे पीएचसी भवन की गैलरी की छत और दीवारें अचानक गिर गईं। देखते ही देखते मलबा कई कमरों के अंदर जा पहुंचा, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे भवन को खाली कराकर जांच शुरू कर दी।
2013 में बनी थी इमारत
यह स्वास्थ्य केंद्र की इमारत वर्ष 2013 में बनाई गई थी। महज 13 वर्ष पुरानी बिल्डिंग का इस तरह ढह जाना निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। भवन का उद्घाटन तत्कालीन सांसद जितेंद्र मलिक और तत्कालीन विधायक जयवीर ने किया था।
डॉक्टर, कर्मचारी और मरीज सुरक्षित
हादसे के समय स्वास्थ्य केंद्र में 7 से 8 कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद थे। यहां एक होम्योपैथिक डॉक्टर, एक एलोपैथिक डॉक्टर और एक डेंटल सर्जन अपनी सेवाएं दे रहे थे। गनीमत रही कि कोई भी मरीज या कर्मचारी मलबे की चपेट में नहीं आया।
25 कमरों वाले भवन को असुरक्षित घोषित करने की तैयारी
पीएचसी भवन में करीब 24 से 25 कमरे हैं। हादसे में गैलरी का बड़ा हिस्सा टूटकर कमरों में गिर गया। इसके बाद पूरे भवन की संरचनात्मक जांच शुरू कर दी गई है और उसे असुरक्षित मानते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।
रोजाना 60 से 80 मरीज लेते हैं इलाज
रोहट पीएचसी में प्रतिदिन 60 से 80 मरीजों की ओपीडी होती है। यह केंद्र रोहट के अलावा आनंदपुर झरोठ, कंवाली, झरोठी, फतेहपुर, हरसाना, बैयांपुर और लहराड़ा समेत आसपास के कई गांवों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है।
सीएमओ अनुराधा जैन बोलीं— चौपाल या दूसरी बिल्डिंग में होगी व्यवस्था
सोनीपत की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराधा जैन ने बताया कि घटना की सूचना उन्हें कुंडली दौरे के दौरान मिली, जिसके बाद वह तुरंत मौके पर पहुंचीं।
उन्होंने कहा कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन भवन को भारी नुकसान पहुंचा है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन से भवन की स्थिति को लेकर चर्चा की गई है। फिलहाल स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए पीएचसी को किसी गांव की चौपाल या उपलब्ध खाली सरकारी भवन में अस्थायी रूप से शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है।
डॉ. जैन ने बताया कि इस स्वास्थ्य केंद्र में करीब 25 कर्मचारी कार्यरत हैं और प्रतिदिन औसतन 60 से 65 मरीजों की ओपीडी होती है।

2024 में ही मांगी गई थी मरम्मत
सीएमओ ने यह भी बताया कि भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए 2024 में विशेष मरम्मत (स्पेशल रिपेयर) के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र भेजा गया था। जनवरी 2026 में मरम्मत का एस्टीमेट भी तैयार कर भेज दिया गया था, लेकिन काम शुरू होने से पहले ही भवन का हिस्सा ढह गया।
जांच के आदेश, उठे कई सवाल
प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह घटना ओपीडी के व्यस्त समय में होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। अब लोग निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

