Jaipur News: राजधानी के पॉश इलाके बीटू बाइपास (B2 Bypass) पर गुरुवार को उस समय युद्ध जैसे हालात बन गए, जब राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की टीम करीब 42 बीघा बेशकीमती सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने पहुंची। हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद दल-बल के साथ पहुंची टीम को स्थानीय लोगों के भारी आक्रोश और पथराव का सामना करना पड़ा।

2200 करोड़ का मामला और मैदान-ए-जंग बनी सड़कें
दरअसल, यह पूरा विवाद बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली उस जमीन का है, जिसकी बाजार कीमत 2200 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में जब दस्ता जेसीबी लेकर बाउंड्री वॉल तोड़ने पहुंचा, तो वहां रह रहे परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया और मशीनों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रशासन को कुछ देर के लिए अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
भू-माफियाओं का फर्जीवाड़ा और जनता का दर्द
गौरतलब है कि इस पूरी जमीन का अधिग्रहण हाउसिंग बोर्ड ने साल 1989 में ही कर लिया था, लेकिन सरकारी सुस्ती का फायदा भू-माफियाओं ने उठाया। सूत्रों ने बताया कि कथित माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे यहां कॉलोनी काट दी और भोले-भाले लोगों को सस्ते प्लॉट बेच दिए। बता दें कि 1991 में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुई थी, लेकिन बोर्ड ने कब्जा नहीं लिया। वहीं पुराने बैक-डेट दस्तावेजों से जमीन का सौदा दिखाया गया। 2019 में कॉलोनी के पट्टे (नियमितीकरण) की कोशिश हुई, जिसे हाउसिंग बोर्ड ने खारिज कर दिया। इस महाघोटाले की फाइल फिलहाल एसीबी के पास है।
अब आगे क्या?
फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन का कहना है कि कोर्ट के आदेश की पालना हर हाल में की जाएगी। वहीं, जिन लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई इन प्लॉटों में लगा दी है, वे अब सड़कों पर उतर आए हैं। इस कार्रवाई ने जयपुर के रियल एस्टेट मार्केट में हड़कंप मचा दिया है क्योंकि कई रसूखदार नाम इस 2200 करोड़ के खेल के पीछे बताए जा रहे हैं।
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