संजय कुमार, जींद। हरियाणा के जींद जिले से एक बड़ी और नजीर पेश करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ की एक फास्ट ट्रैक अदालत ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज एक बेहद गंभीर मामले में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को दोषी पाते हुए 20 साल की कठोर कारावास (जेल) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

यह पूरा मामला उचाना हलके के एक गांव से जुड़ा है, जहां साल 2024 में इस शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया गया था। माननीय जज शिफा करण सिंह की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि अगर दोषी जुर्माना नहीं भरता है, तो उसे एक साल की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। इसके अलावा, पीड़िता के परिवार को संबल देने के लिए ₹4 लाख की आर्थिक सहायता देने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

दुकान से लौटते वक्त पड़ोसी ने खींचा था अंदर (Jind Crime News)

घटनाक्रम के अनुसार, यह वारदात वर्ष 2024 की दोपहर को हुई थी। घर से महज कुछ दूरी पर स्थित एक दुकान से नाबालिग लड़की सिलाई का धागा और रील लेने गई थी। इसी दौरान पड़ोस में ही रहने वाले आरोपी ने सूनेपन का फायदा उठाया। उसने मासूम बच्ची को सरेराह गली से घसीटा और अपने घर के भीतर ले जाकर उसके साथ गलत काम किया। घटना के बाद बदहवास पीड़िता की मां ने थाने पहुंचकर हिम्मत दिखाई और आरोपी के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए पॉक्सो एक्ट समेत कई अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

रंजिश का बहाना नहीं आया काम, DNA रिपोर्ट ने खोली पोल (Jind POCSO Act Case Court Verdict)

मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने खुद को बेकसूर बताते हुए इसे एक राजनीतिक साजिश करार देने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि पंचायत और चुनावी रंजिश के कारण उन्हें इस केस में झूठा फंसाया जा रहा है।

लेकिन, पुलिस की पुख्ता जांच और मेडिकल साइंस के आगे आरोपी के यह बहाने टिक नहीं सके। पीड़िता और आरोपी की डीएनए (DNA) रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई, जिसमें आरोपी के सैंपल पूरी तरह मैच हो गए। डीएनए रिपोर्ट आते ही अदालत में आरोपी का गुनाह पूरी तरह साबित हो गया। लगभग दो साल तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार कोर्ट ने आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया।

लड़कों को भी मिले कड़े कानूनों की सीख: सरकारी वकील (Special Prosecutor Yogendra Rathi Statement)

मामले की पैरवी कर रहे सरकारी वकील योगेंद्र राठी ने इस फैसले की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और डीएनए रिपोर्ट को मुख्य आधार मानते हुए दोषी को सजा दी है। उन्होंने बेहद जरूरी बात कहते हुए कहा कि ऐसे मामलों में बच्चों को गहरी मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है।

राठी ने समाज को नसीहत देते हुए कहा कि आज हम हर जगह लड़कियों को ‘गुड टच और बैड टच’ की जानकारी दे रहे हैं, जो बहुत अच्छी बात है। लेकिन, अब समय आ गया है कि लड़कों को भी बचपन से यह जागरूकता और संस्कार दिए जाएं कि किसी नाबालिग के साथ गलत काम करने का अंजाम कितना खौफनाक और कड़ा हो सकता है।

जींद में बढ़ रहे हैं मामले, फास्ट ट्रैक कोर्ट में तेजी से सुनवाई

सरकारी वकील ने जींद जिले के डराने वाले आंकड़े भी सामने रखे हैं। उन्होंने बताया कि सिर्फ पिछले एक महीने के भीतर ही जींद की अदालतों में पॉक्सो एक्ट के करीब 10 से 11 मामलों की सुनवाई हुई है। वहीं पूरे साल भर में करीब 100 से 115 मामले सामने आते हैं। राहत की बात यह है कि अब फास्ट ट्रायल कोर्ट की वजह से पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट के मामलों की सुनवाई बहुत तेजी से हो रही है, जिससे पीड़ितों को समय पर न्याय मिल पा रहा है।