राजकुमार दुबे, भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। कुछ दिन पहले छात्रावासों में पढ़ने वाले दो मासूम बच्चों की मलेरिया से मौत के बाद अब जिले में तीसरी मौत का मामला सामने आया है। ताजा मामला भानुप्रतापपुर विकासखंड के चीज़गांव का है, जहां मलेरिया पॉजिटिव महिला की समय पर इलाज नहीं मिलने और एंबुलेंस पहुंचने में देरी के कारण मौत होने का आरोप लगाया जा रहा है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसे भी पढ़ें : Kanker Malaria Death Case: 2 छात्रों की मलेरिया से मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट

मलेरिया पॉजिटिव मिलने के बाद भी नहीं पहुंची स्वास्थ्य टीम

भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम चीज़गांव के आवास पारा निवासी राकेश्वरी कल्लो की मंगलवार सुबह मलेरिया से मौत हो गई। परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, 27 जुलाई को गांव की मितानिन ने घर पहुंचकर महिला की जांच की थी, जिसमें वह मलेरिया पॉजिटिव पाई गई थी।

मितानिन ने इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी थी और महिला को मलेरिया की दवा भी उपलब्ध कराई। हालांकि, आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम मरीज को देखने गांव नहीं पहुंची। वहीं मंगलवार सुबह महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गई। इसके बाद 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई, लेकिन एंबुलेंस करीब डेढ़ घंटे की देरी से पहुंची। गंभीर हालत में महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कलेक्टर के निर्देश के बाद भी व्यवस्था पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक दिन पहले ही 27 जुलाई को कांकेर कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने जिले में बढ़ते मलेरिया के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

वहीं संयोग से आज 28 जुलाई को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी कांकेर पहुंचे थे, जहां उन्होंने बस्तर संभाग के स्वास्थ्य अधिकारियों की बैठक लेकर मलेरिया नियंत्रण की रणनीति पर चर्चा की थी। इसके बावजूद जिले में मलेरिया से तीसरी मौत ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

तीन महीने पहले दिया था जुड़वा बच्चियों को जन्म

इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि राकेश्वरी कल्लो ने महज तीन महीने पहले जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया था। मां की असमय मौत के बाद दोनों मासूम बच्चियां अब मां की स्नेह से वंचित हो गई हैं।

कांकेर जिले में लगातार सामने आ रही मलेरिया से मौतें यह संकेत दे रही हैं कि बीमारी पर नियंत्रण के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H