दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश बीएंडबी होटल में 22 लोगों की मौत वाले भीषण अग्निकांड मामले में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली की एक अदालत ने होटल के कुक केसर नेगी को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने वाली फॉरेंसिक रिपोर्ट अभी तक जांच एजेंसियों को प्राप्त नहीं हुई है, ऐसे में केवल एक गवाह के बयान के आधार पर आरोपी की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। अदालत ने माना कि मामले की जांच अभी जारी है और आग लगने की परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में आरोपी की भूमिका का आकलन उपलब्ध साक्ष्यों और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा- फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार जरूरी
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश बीएंडबी होटल में 22 लोगों की मौत वाले भीषण अग्निकांड मामले में पुलिस ने दावा किया था कि हादसे की शुरुआत होटल की रसोई में रखे ऑयल फ्रायर (Oil Fryer) से हुई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, होटल के कुक केसर नेगी ने अपने लिए चाय बनाने से पहले तेल से भरे फ्रायर को चालू किया था, लेकिन बाद में उसे बंद करना भूल गया। पुलिस के मुताबिक, लंबे समय तक चालू रहने के कारण फ्रायर में मौजूद तेल अत्यधिक गर्म हो गया और उसने स्वतः आग पकड़ ली। इसके बाद आग रसोई की छत तक पहुंची और वहां मौजूद ज्वलनशील सामग्री के संपर्क में आने से तेजी से पूरे परिसर में फैल गई। इसी आग ने बाद में भीषण रूप धारण कर लिया, जिसमें 22 लोगों की जान चली गई। जांच में पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि जब केसर नेगी वापस रसोई में पहुंचा तो उसने शुरुआत में आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग बेकाबू होने पर वह वहां से निकल गया। पुलिस का कहना था कि उसने होटल में ठहरे मेहमानों को खतरे के बारे में आगाह नहीं किया और न ही तत्काल पुलिस या दमकल विभाग को सूचना दी।
जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि मामले में आग लगने के कारणों को लेकर अभी तक फॉरेंसिक रिपोर्ट रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस स्तर पर किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी निश्चित रूप से तय नहीं की जा सकती। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसियों ने आग लगने की वजह को लेकर कुछ दावे किए हैं, लेकिन वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट के अभाव में उन दावों की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि आग वास्तव में किस कारण से लगी थी। कोर्ट ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से एक गवाह के बयान पर आधारित है। केवल एक गवाह के बयान के आधार पर आरोपी पर आपराधिक जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा, खासकर तब जब मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण फॉरेंसिक रिपोर्ट अभी लंबित हो।
111 पन्नों की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस, नगर निगम (एमसीडी), दिल्ली सरकार के पर्यटन विभाग और बीएसईएस राजधनी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया कि संबंधित एजेंसियां समय पर नियमों के अनुपालन और निरीक्षण सुनिश्चित करने में विफल रहीं, जिसके कारण कई कथित अनियमितताओं के बावजूद इमारत लंबे समय तक बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) के रूप में संचालित होती रही। रिपोर्ट के अनुसार, भवन से जुड़े सुरक्षा मानकों, लाइसेंसिंग और निगरानी व्यवस्था में कमियों के कारण नियमों के उल्लंघन की स्थिति बनी रही। जांच में यह भी संकेत दिया गया कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और निगरानी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बनाया।
6 कमरों की मंजूरी, चल रहे थे 26 कमरे; जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे
मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश बीएंडबी होटल में 22 लोगों की मौत वाले भीषण अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट में भवन के संचालन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, होटल को केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन कथित तौर पर वहां 26 कमरे संचालित किए जा रहे थे। जांच में सामने आया कि अतिरिक्त कमरों में बेसमेंट और छत पर बनाए गए कमरे भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इमारत का उपयोग स्वीकृत मानकों से कहीं अधिक किया जा रहा था, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ गए थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जिस ग्राउंड फ्लोर पर केवल चाय-नाश्ते की दुकान चलाने की अनुमति दी गई थी, वहां कथित तौर पर पूरा रेस्टोरेंट संचालित किया जा रहा था। जांच अधिकारियों ने इसे स्वीकृत उपयोग शर्तों का उल्लंघन बताया है।सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार, इमारत में आपात स्थिति के दौरान बाहर निकलने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। बेसमेंट का निकास मार्ग बंद पाया गया, जबकि कई कमरों में डिजिटल लॉक लगे हुए थे। आग लगने के दौरान इन लॉक की वजह से कई लोगों को बाहर निकलने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट ने इस त्रासदी के लिए केवल एक व्यक्ति की भूमिका पर नहीं, बल्कि भवन प्रबंधन, सुरक्षा मानकों के पालन और निगरानी तंत्र की विफलताओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस, एमसीडी, पर्यटन विभाग और बीआरपीएल की कार्यप्रणाली में भी कमियों का जिक्र किया गया है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


