संदीप शर्मा, विदिशा। सोशल मीडिया का छलावा कब किसके लिए मुसीबत बन जाए इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। कुछ ऐसा ही मामला विदिशा से सामने आया है। जहां सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को देखकर भीषण गर्मी से राहत पाने एक खंती में नहाने पहुंचे युवक की मौत हो गई। इस खंती का निर्माण हाल ही में सड़क निर्माण के दौरान हुई थी। ठेकेदारों ने इस जगह की मिट्टी खोदकर सड़क निर्माण में तो इस्तेमाल कर लिया लेकिन इस खंती को ऐसे ही छोड़ दिया। जो आज एक युवक की मौत का कारण बन गई।
ये भी पढ़ें : 3 साल से चक्कर काट रहा था अन्नदाता, सुनवाई न होने पर कलेक्ट्रेट में किया आत्मदाह का प्रयास, सुरक्षाकर्मियों ने बचाया
सड़क निर्माण के दौरान खंती का हुआ निर्माण
जानकारी के मुताबिक विदिशा-रायसेन रोड में इन खंतियों का निर्माण हुआ है। बताया जा रहा है कि हाल ही में सड़क निर्माण के दौरान यहां की मिट्टी खोदकर सड़क बनाने में इस्तेमाल किया गया था। जिसके बाद यहा बड़ा गड्ढा हो गया। बरसात का पानी भरने से इन खंतियों ने एक कृत्रिम तालाब का रूप ले लिया।
सोशल मीडिया पर बना आकर्षण का केंद्र
इन दिनों भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए कुछ युवाओं ने पानी में उतरकर मस्ती की और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो वायरल होने के बाद देखते ही देखते यहां भीड़ जुटने लगी और लोग बेखौफ होकर इन खंतियों में उतरने लगे।
पानी की गहराई जाने बिना खंतियों में उतरे लोग
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई। टूरिस्ट यहां भारी संख्या में पहुंचने लगे और पानी में खतरे का अंदाजा लगाए बिना इसमें उतरने लगे। इसी तरह युवक अपने दोस्तों के साथ भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए यहां नहाने पहुंचा था जो गहरे पानी में डूबने लगा। जैसे ही युवक पानी में डूबा तो आस-पास मौजूद लोगों ने उसे बाहर निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
ये भी पढ़ें : मेट्रो प्रोजेक्ट पर HC के आदेश का उल्लंघन! कलेक्टर कार्यालय में धरने पर बैठे समाजसेवी किशोर कोटवानी, मुलाकात के बाद खत्म हुआ आंदोलन
युवक की मौत का जिम्मेदार कौन?
युवक की मौत के बाद एक बड़ा सवाल यह सामने आता है कि इस हादसे का जिम्मेदार कौन है? सोशल मीडिया की रील या फिर प्रशासन जिसने इन खंतियों का निर्माण किया और सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और यहां लोगों के पहुंचने के बाद भी स्थानीय प्रशासन द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और ना ही इन्हें रोका गया।

