हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े माननीय हाईकोर्ट के आदेशों का पालन न होने से नाराज समाजसेवी किशोर कोटवानी जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। कलेक्ट्रेट में धरने की खबर से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। हालांकि बाद में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात और आश्वास मिलने के बाद उन्होंने अपना धरना समाप्त कर दिया।
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HC के आदेश के बाद बी मेट्रो प्रशासन ने नहीं सौंपे दस्तावेज
समाजसेवी किशोर कोटवानी ने मामले की गंभीरता को स्पस्ठ करते हुए बताया कि हाईकोर्ट ने इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर दो प्रमुख बिंदुओं पर सख्त आदेश दिए थे। इस प्रोजेक्ट से जुड़े तीन मुख्य मुद्दे बेहद संवेदनशील है। जिसमें पहला एनवायरमेंट इम्पैक्ट कमेटी की रिपोर्ट, भूजल सर्वे की NOC और हैरिटेज एक्ट का कड़ाई से पालन और प्रस्ताव का ठहराव है।
कोटवानी ने आरोप लगाया कि बीती 5 तारीख को इस मामले में न्यायालय में अहम सुनवाई हुई थी। लेकिन मेट्रो प्रबंधन ने कोर्ट के सामने सिर्फ मौखिक दलीलें पेश कीं, कोई भी ठोस दस्तावेजी जवाब जमा नहीं किया। मैंने प्रशासन से मांग की है कि इस पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
कलेक्टर ने दिए भौतिक सत्यापन के आदेश
कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात के बाद किशोर कोटवानी ने बताया कि प्रशासन ने उनकी मांगों को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर ने पूरे मामले की जमीनी हकीकत जानने के लिए एक विशेष कमेटी को भौतिक सत्यापन करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने इस पूरे मामले में दस्तावेजी साक्ष्य और निराकरण रिपोर्ट पेश करने के लिए 4 तारीख तक का समय मांगा है।
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इन 5 गंभीर मुद्दों पर होगी विभागों की संयुक्त बैठक
इंदौर में मेट्रो निर्माण के कारण आम जनता को हो रही परेशानियों को लेकर कलेक्टर ने शहर की प्रदूषण, लगातार गिरता भूजल स्तर, प्रशासनिक मनमानी, बेकाबू ट्रैफिक और रोजाना लगने वाले भारी जाम जैसे 5 मुख्य मुद्दों पर सभी संबंधित विभागों को तत्काल पत्र लिखने की सहमति दी है। इन बिंदुओं पर जल्द ही विभागवार समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।

