सुशील खरे, रतलाम। प्रशासनिक व्यवस्था और किसान की लाचारी को उजागर करती एक खबर सामने आई है। जिला कलेक्ट्रेट में चल रही जनसुनवाई के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक किसान ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्महत्या करने की कोशिश की। मौके पर मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों और गार्डों ने तत्परता दिखाते हुए किसान को पकड़ा और एक बड़ा हादसा होने से टाल दिया।
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दवाई कंपनी ने बर्बाद की थी 5 बीघा की फसल
पीड़ित किसान ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि करीब 3 साल पहले उसने अपनी तीन बीघा जमीन पर लहसुन और दो बीघा जमीन पर प्याज की फसल बोई थी। फसल को कीड़ों से बचाने के लिए किसान ने डाक के माध्यम से एक निजी कंपनी से फसल रक्षक दवाई मंगवाई थी। आरोप है कि इस दवाई के छिड़काव के महज चार दिनों के भीतर ही उसकी 5 बीघा की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई।
3 साल से कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहा पीड़ित
फसल बर्बाद होने के बाद किसान पूरी तरह आर्थिक तंगी के दलदल में धंस गया है। उसने तीन साल पहले कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर इस धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। किसान का कहना है कि शिकायत के बाद प्रशासन ने एक जांच टीम भी गठित की थी लेकिन उस जांच टीम ने रिपोर्ट आने के बाद भी दोषी दवाई कंपनी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

मजबूरी में उठाया खौफनाक कदम
किसान ने रोते हुए कहा मैं पिछले तीन सालों से लगातार कलेक्टर कार्यालय के चक्कर काट-काटकर थक चुका हूं। मेरी आर्थिक स्थिति बदतर हो चुकी है लेकिन शासन-प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। इसी लाचारी और परेशानी से तंग आकर मुझे कलेक्ट्रेट में खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा और जनसुनवाई में आने वाले पीड़ितों की समस्याओं के निपटारे की गति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी किसान को शांत कराकर मामले की जांच और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दे रहे हैं।


