केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पानीपत में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवा शक्ति देश का भविष्य है और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्री के इस्तीफे को केवल हार-जीत के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

पानीपत। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां आंदोलनरत छात्रों और विपक्षी दलों में इसे बड़ी राजनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं अब भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

पानीपत में दिशा (District Development Coordination and Monitoring Committee) की बैठक में शामिल होने पहुंचे मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि युवा शक्ति देश का भविष्य है और युवाओं की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना बेहद जरूरी है।

36 दिनों तक चला छात्रों का आंदोलन

बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का करीब 36 दिनों तक आंदोलन चला। पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान छात्रों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मांगें उठाई थीं।

छात्रों का आरोप था कि पेपर लीक और परीक्षाओं से जुड़ी अनियमितताओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार से जवाबदेही तय करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की थी।

इस्तीफे के बाद विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के लंबे आंदोलन की जीत बताया। कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि सरकार को आखिरकार युवाओं के दबाव के आगे झुकना पड़ा।

विपक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार को लगातार घेरा गया और 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ।

मनोहर लाल ने कहा- युवा शक्ति देश का भविष्य

इसी बीच पानीपत पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि युवा शक्ति देश का भविष्य है। उन्होंने कहा कि युवाओं की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए और उनकी बातों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उन्होंने इसे सीधे तौर पर हार या जीत के नजरिए से देखने से इनकार किया। मनोहर लाल ने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ है तो उसे केवल हार-जीत के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

उनकी इस प्रतिक्रिया को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा की ओर से आई महत्वपूर्ण प्रतिक्रियाओं में से एक माना जा रहा है।

पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार से लगातार सवाल

दरअसल, पिछले कुछ समय से देश में प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्रों में नाराजगी रही है। विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र संगठनों ने आंदोलन किए हैं।

छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से मेहनत करने वाले लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। वहीं विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब छात्रों की अन्य मांगों पर भी नजरें टिकी हुई हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से मुकदमे वापस लेने, परीक्षा व्यवस्था में सुधार करने और कथित पेपर लीक मामलों में जिम्मेदारी तय करने जैसी मांगें उठाई जा रही हैं।