​मोकामा/पटना। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मोकामा के मरंची प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से एक बेहद असंवेदनशील मामला सामने आया है जहां एक बेहोश मरीज इलाज के अभाव में एम्बुलेंस (बस) में ही एक घंटे तक तड़पता रहा। अस्पताल कर्मियों की कथित लापरवाही के कारण न केवल मरीज की जान जोखिम में पड़ी बल्कि स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश भी फैल गया।

​क्या था पूरा मामला?

​हाथीदह थाना क्षेत्र स्थित राजेंद्र सेतु के निकट दुखहरण स्थान घाट पर एक 50 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति पानी में डूब गया था। वहां मौजूद रेल ब्रिज के सतर्क मजदूरों ने समय रहते उसे पानी से बाहर निकाल लिया। उस समय व्यक्ति अचेत अवस्था में था। उसकी जान बचाने की मंशा से मजदूरों ने उसे तुरंत एक मिनी बस में लादकर मरंची पीएचसी पहुंचाया ताकि उसे फौरन प्राथमिक उपचार मिल सके।

​घंटों बस में पड़ा रहा मरीज, मदद को नहीं बढ़े हाथ

​अस्पताल पहुंचने के बाद भी उस बीमार व्यक्ति की त्रासदी कम नहीं हुई। बस चालक ने अस्पताल के कर्मचारियों से मदद की गुहार लगाई कि मरीज बेहोश और भारी है इसलिए उसे अकेले अंदर लाना मुमकिन नहीं है। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने संवेदनहीनता की हद पार करते हुए मदद करने से साफ इनकार कर दिया। कर्मचारियों का दोटूक जवाब था कि जब तक मरीज को स्ट्रेचर तक खुद नहीं लाया जाएगा तब तक इलाज शुरू नहीं किया जाएगा। इस दौरान मरीज एक घंटे तक बस में ही अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा।

​बिना उपचार एनएमसीएच किया रेफर

​अस्पताल की इस घोर लापरवाही की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हो गया। लोगों के आक्रोश को देखते हुए आनन-फानन में डॉक्टरों ने मरीज को बिना कोई प्राथमिक उपचार दिए सीधे पटना स्थित एनएमसीएच (NMCH) के लिए रेफर कर दिया। घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची हाथीदह थाना पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया और मरीज को पटना भेजा। फिलहाल मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है और पुलिस उसकी पहचान सुनिश्चित करने के प्रयास में जुटी है।

​सिविल सर्जन ने दिए जांच के आदेश

​इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है। संज्ञान लेते हुए सिविल सर्जन योगेंद्र प्रसाद मंडल ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके विरुद्ध कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना इस बात को दर्शाती है कि पीएचसी स्तर पर सुविधाओं के बावजूद मानवीय दृष्टिकोण की कितनी कमी है।