महाराष्ट्र में कैब और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किए जाने का मामला अब बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। मोबाइल कैब एग्रीगेटर ऐप के जरिए सेवाएं देने वाले चार कैब चालकों ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। याचिका पर तत्काल निर्देश के लिए 27 अगस्त को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनवाई करेंगे।

कैब चालकों ने नियम को क्यों दी चुनौती?

अधिवक्ता विवेक शुक्ला के माध्यम से दायर याचिका में चालकों ने दावा किया है कि मराठी भाषा की अनिवार्यता उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। याचिका के अनुसार, यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 19 (व्यवसाय करने की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) के विपरीत है।

चालकों ने यह भी तर्क दिया है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए किसी विशेष भाषा का ज्ञान अनिवार्य नहीं किया गया है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त भाषा संबंधी शर्त लागू करना कानूनी रूप से उचित नहीं है।

9.65 लाख चालकों की आजीविका का हवाला

याचिका में कहा गया है कि नए नियम के सख्ती से लागू होने पर करीब 9.65 लाख गरीब कैब और टैक्सी चालकों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। चालकों ने हाई कोर्ट से नियम के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की है।

15 अगस्त के बाद शुरू हुआ जांच अभियान

महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन कर ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य किया है। सरकार ने शुरुआत में चालकों को मराठी सीखने के लिए तीन महीने की मोहलत दी थी। यह अवधि 15 अगस्त को समाप्त हो गई। इसके बाद 20 अगस्त से प्रवर्तन अधिकारियों ने जांच अभियान शुरू कर नोटिस जारी करने शुरू किए हैं।

मुंबई में कैब चालकों की तीन दिवसीय हड़ताल

नए नियम के विरोध में मुंबई में कैब चालकों ने 24 अगस्त से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू की है। अब इस पूरे विवाद पर 27 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत के निर्देश से यह स्पष्ट हो सकता है कि मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर सरकार के फैसले पर तत्काल रोक लगती है या नियम फिलहाल लागू रहता है।

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