गौरव जैन, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले में लल्लूराम डॉट कॉम की खबर का एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है। मरवाही वनमंडल के पीपरखूंटी क्षेत्र में सामने आए अवैध पेड़ कटाई के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने बीट गार्ड को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि रेंजर और डिप्टी रेंजर के खिलाफ भी निलंबन की अनुशंसा भेजी गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर से राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल और बिलासपुर वृत्त की संयुक्त टीम ने मौके पर जांच की थी। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार गौरेला वन परिक्षेत्र के पीपरखूंटी बीट अंतर्गत कक्ष क्रमांक 2305 पीएफ, 2325 पीएफ, 2301 पीएफ, 2300 पीएफ और 2299 पीएफ में विभिन्न प्रजातियों के कुल 122 अवैध कटाई के ठूंठ पाए गए। मौके पर वनोपज न मिलने और बड़े पैमाने पर कटाई की पुष्टि के बाद शासन को करीब 2,60,082 रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

बीट गार्ड निलंबित

वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने बीट गार्ड दीपक सिदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि वन सुरक्षा में नियमित भ्रमण न करना, शासकीय दायित्वों में लापरवाही और उदासीनता प्रथम दृष्टया दोषी पाई गई है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय वनपरिक्षेत्र खोडरी निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

देखें आदेश

रेंजर और डिप्टी रेंजर पर भी कार्रवाई की अनुशंसा

DFO ग्रीष्मी चांद ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए गौरेला रेंजर प्रबल कुमार दुबे और डिप्टी रेंजर संत राम रजक के निलंबन का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

कार्रवाई के बीच उठ रहे गंभीर सवाल

हालांकि, इस कार्रवाई के बीच अब सवाल भी तेज हो गए हैं कि केवल निलंबन भर से मामला खत्म नहीं होना चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि तस्करी किए गए पेड़ों का आखिर हुआ क्या? क्या इन्हें चोरी-छिपे लकड़ी मिलों में खपाया गया या इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी गहन जांच होनी चाहिए।

यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इतनी बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई कैसे संभव हुई और काटे गए पेड़ कहां ले जाए गए। स्थानीय स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि जांच केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर हर कड़ी को खंगाला जाए।

लोगों का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ विभागीय निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इस पूरे अवैध कारोबार में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। तभी इस तरह की घटनाओं पर वास्तविक रोक लग पाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या जांच के बाद सभी जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह धीरे-धीरे फाइलों में सिमटकर रह जाता है।

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