कर्ण मिश्रा, ग्वालियर/मुरैना। चर्चित केएस ऑयल्स एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला करीब 75 करोड़ रुपये के ट्रेड फाइनेंस घोटाले का है। आरोप है कि सरकारी कंपनी स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (STC) के अधिकारियों और केएस ऑयल्स के पदाधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का खेल किया गया। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने 12 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
83.30 करोड़ के लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर दिए
सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक साल 2010 से 2014 के बीच एसटीसी ने केएस ऑयल्स लिमिटेड को सरसों तेल खरीदने के लिए 75 करोड़ रुपये का ट्रेड फाइनेंस मंजूर किया था। जांच में सामने आया कि नियमों को दरकिनार कर कंपनी की वित्तीय स्थिति और साख की उचित जांच किए बिना लोन स्वीकृत किया गया, इतना ही नहीं, 75 करोड़ की मंजूरी के बावजूद करीब 83.30 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर दिए गए।
एलसी की रकम वापस केएस ऑयल्स के खातों में पहुंचाई
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि जिन दो कंपनियों को सरसों तेल सप्लाई करने वाला बताया गया, वे वास्तव में शेल कंपनियां थीं और उनका संचालन भी केएस ऑयल्स से जुड़े लोगों द्वारा किया जा रहा था। इन कंपनियों के जरिए जारी की गई एलसी की रकम वापस केएस ऑयल्स के खातों में पहुंचाई गई। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब गुना और मुरैना स्थित टैंकों का निरीक्षण किया गया,जहां सरसों तेल होना चाहिए था, वहां 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी मिला। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की और कंपनी को लगातार राहत दी जाती रही। इस पूरे मामले में एसटीसी को करीब 74 करोड़ 77 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
जांच सीबीआई के डीएसपी गौरव सोम को सौंपी
सीबीआई ने इस मामले में तत्कालीन एसटीसी के कई सीनियर अधिकारियों, केएस ऑयल्स लिमिटेड, उसके चेयरमैन रमेश चंद गर्ग, डायरेक्टर दवेश अग्रवाल, स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर अमित खंडेलवाल सहित 12 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश,धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच सीबीआई के डीएसपी गौरव सोम को सौंपी गई है।
सरकारी धन के दुरुपयोग की परतें खोलने में जुटी
करीब डेढ़ दशक पुराने इस कथित घोटाले में सीबीआई की एफआईआर के बाद एक बार फिर केएस ऑयल्स और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। अब जांच एजेंसी पूरे वित्तीय लेन-देन, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और सरकारी धन के दुरुपयोग की परतें खोलने में जुटी है।

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