अजय सैनी, भिवानी। भिवानी नगर परिषद में विकास कार्यों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। शहर के विभिन्न वार्डों के पार्षदों ने नगर परिषद प्रशासन और अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए समाधान शिविर और सीएम विंडो में शिकायतें दर्ज कराई हैं। पार्षदों का आरोप है कि पिछले चार वर्षों से शहर में विकास कार्यों के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

पार्षदों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भिवानी शहर का विकास नहीं बल्कि विनाश हो रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हैं जैसे किसी बीमार व्यक्ति को सिर्फ मेकअप लगाकर स्वस्थ दिखाने की कोशिश की जा रही हो। इस दौरान पार्षद कमलेश देवी, अनिल कुमार, जयवीर रंगा, सरला, मनीष गुरेजा, प्रदीप कौशिक, सुदामा सिंह, अंकुर कौशिक और विनोद प्रजापति सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

पार्षदों का कहना है कि वार्डों की समस्याओं को लेकर वे लगातार अधिकारियों और चेयरपर्सन प्रतिनिधि के समक्ष मुद्दे उठाते रहे हैं, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया जाता है। उनका आरोप है कि जब चुने हुए जनप्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं हो रही तो आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।

सफाई व्यवस्था को लेकर भी पार्षदों ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों की तैनाती में भारी असमानता है। कुछ वार्डों में एक कर्मचारी है तो कुछ में 20-20 कर्मचारी लगाए गए हैं। कई प्रमुख सड़कों पर वर्षों से सफाई नहीं होने का दावा भी किया गया। साथ ही सार्वजनिक शौचालयों पर ताले लटकने और नालियों की सफाई नहीं होने से डेंगू व मलेरिया का खतरा बढ़ने की बात कही गई।

मॉडल रोड और बरसाती नाला परियोजना को लेकर भी पार्षदों ने विजिलेंस जांच की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है। मानसून से पहले बरसाती नाले की तकनीकी खामियों के कारण शहर में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई गई है।

पार्षदों ने नगर परिषद में खरीद और निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के भी आरोप लगाए। उन्होंने पार्क बेंच, शाइन बोर्ड, डस्टबिन और स्ट्रीट लाइटों की खरीद में गड़बड़ी की जांच की मांग की है। साथ ही मॉडल रोड और अन्य परियोजनाओं की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।