अजय सैनी, भिवानी। शहर को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है. यहां के शिव मंदिरों में साल में दो बार श्रद्धालुओं का भारी मेला लगता है. भिवानी के प्रसिद्ध जोगी वाला शिव मंदिर की कहानी बहुत ही पुरानी और अनोखी है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना माना जाता है. इस मंदिर में शिव प्रतिमा की स्थापना बाबा मस्तनाथ के शिष्य बाबा मेहूनाथ ने की थी.
मूरत आगे ले जाना हुआ नामुमकिन
इस मंदिर के बनने के पीछे एक बहुत पुरानी लोककथा जुड़ी हुई है. करीब 300 साल पहले एक गाड़ीवान भगवान शिव की एक मूर्ति को जींद की तरफ ले जा रहा था. रास्ते में रात होने पर वह भिवानी के इसी स्थान पर रुक गया. उसने रात यहीं विश्राम किया. अगली सुबह जब उसने आगे बढ़ने की कोशिश की तो वह मूरत को उस जगह से आगे नहीं ले जा पाया. काफी कोशिशों के बाद भी जब मूरत आगे नहीं बढ़ी तो लोगों ने इसे भगवान शिव की ही इच्छा माना. इसके बाद उसी स्थान पर उस मूरत को स्थापित कर दिया गया. आगे चलकर यह स्थान जोगी वाला मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया.
पीढ़ियों से चली आ रही है अटूट परंपरा
आज यह मंदिर लाखों लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है. महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहां का नजारा देखने लायक होता है. मंदिर के महंत वेदनाथ महाराज ने बताया कि यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है. शहर के कई ऐसे परिवार हैं जिनकी 7वीं और 8वीं पीढ़ी आज भी रोजाना सुबह और शाम भोले बाबा के दर्शन करने आती है. हर साल हरिद्वार से सैकड़ों कांवड़िए पवित्र गंगाजल लाकर यहां जलाभिषेक करते हैं. मंदिर परिसर में हर साल साधु-संतों का सम्मान और बड़े धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं.
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