लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अब केवल योजनाओं पर नहीं, बल्कि रिसर्च और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर भी जोर देना शुरू कर दिया है. इसी दिशा में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इसका उद्देश्य प्रदेश में रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु और नवजात जटिलताओं को कम करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है.
शुक्रवार को योजना भवन में हुए इस समझौते के तहत दोनों संस्थाएं मिलकर मातृ मृत्यु, एनीमिया, कुपोषण और नवजात स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करेंगी. इसके आधार पर ऐसी रणनीतियां तैयार होंगी, जिनका सीधा उपयोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में किया जा सकेगा.
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एमओयू के तहत विश्वविद्यालय स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान, सर्वेक्षण, तकनीकी विशेषज्ञता, निगरानी और मूल्यांकन में सहयोग देगा. वहीं स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन प्राथमिकता वाले स्वास्थ्य क्षेत्रों की पहचान, नीति निर्माण और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगा.
इस साझेदारी की एक खास बात यह भी है कि केवल शोध तक सीमित रहने के बजाय Evidence-based Guidelines, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), ऑपरेशनल मैनुअल और पॉलिसी डॉक्यूमेंट भी तैयार किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में एकरूपता और गुणवत्ता लाई जा सके. साथ ही आयुष चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, फील्ड वर्कर्स और अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित होंगे. तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहने वाला यह समझौता किसी वित्तीय लेन-देन पर आधारित नहीं है. दोनों संस्थाएं अपने-अपने संसाधनों से कार्य करेंगी और जरूरत पड़ने पर विशेष परियोजनाओं के लिए अलग व्यवस्था की जाएगी.


