अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से वन विभाग और बिजली विभाग की घोर लापरवाही उजागर करने वाली बेहद ही दर्दनाक घटना सामने आई है। मऊगंज के मलकपुर गांव में विद्युत प्रवाहित खुले तारों की चपेट में आने से एक मादा हाथी की मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है, वहीं बेजुबान की मौत के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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6 महीने से रीवा-सीधी-मऊगंज क्षेत्र में विचरण कर रहा था हाथियों का जोड़ा
जानकारी के अनुसार, हाथियों का एक जोड़ा पिछले करीब 6 महीनों से मऊगंज, रीवा और सीधी जिले के सीमावर्ती जंगलों व मैदानी इलाकों में लगातार विचरण कर रहा था। वन विभाग का दावा था कि हाथियों की हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। लेकिन मलकपुर के खेतों के पास से गुजर रही बिजली की निचली व खुली लाइनों ने इन दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी।
रेडियो कॉलर लगाने के बावजूद लापरवाही क्यों?
हैरानी की बात यह है कि इस हाथी को बाकायदा ‘रेडियो कॉलर’ से लैस किया गया था, ताकि उसकी लोकेशन का पल-पल अपडेट मिलता रहे। इसके बावजूद रिहायशी इलाकों और खेतों के आसपास सुरक्षात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए? जब वन विभाग के पास हाथी की सटीक लोकेशन मौजूद थी, तो संबंधित बिजली विभाग को अलर्ट जारी कर बिजली आपूर्ति या तारों की ऊंचाई को दुरुस्त क्यों नहीं कराया गया?
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सिस्टम की नाकामी पर उठे तीखे सवाल
हादसे के बाद साथी नर हाथी भी अकेले भटकने को मजबूर है। इस दर्दनाक घटना ने दोनों विभागों के बीच आपसी तालमेल और सतर्कता की कलाई खोल दी है। स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी गुस्सा है।
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