अभय मिश्रा, मऊगंज। डिजिटल इंडिया के इस दौर में आपने ऑनलाइन पेमेंट से सब्जी खरीदते, दवा खरीदते या होटल का बिल चुकाते तो बहुत देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि पुलिस की अवैध वसूली भी अब ऑनलाइन और डिजिटल हो चुकी है ? जी हां, चौकिए मत! रीवा संभाग के मऊगंज जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने खाकी को पूरी तरह दागदार कर दिया है।
मऊगंज का हनुमना थाना… जहां कानून का राज नहीं, बल्कि वसूली का ‘डिजिटल सिंडिकेट’ चल रहा है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश सीमा से निकलने वाले 100 से अधिक ट्रैक्टरों और ट्रकों से एंट्री, नो-एंट्री और ओवरलोडिंग के नाम पर लाखों की वसूली की जा रही है। और इस वसूली का जरिया कोई और नहीं, बल्कि एक किराना दुकान का ऑनलाइन स्कैनर है! आखिर क्या है यह पूरा खेल, और इस खेल के पीछे कौन से सफेदपोश और बड़े अधिकारी बैठे हैं जो इनका संरक्षण कर रहे हैं
खुलेआम वसूली
उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा मऊगंज जिले का हनुमना थाना क्षेत्र इस समय चर्चा में है। जहां से प्रतिदिन 100 से अधिक गिट्टी, बालू और पाटिया से लदे वाहन उत्तर प्रदेश की ओर जाते हैं। लेकिन इन गाड़ियों को सुरक्षित पार कराने का जो खेल चल रहा है, उसने पुलिसिया तंत्र की साख को मिट्टी में मिला दिया है। सूत्रों और आरोपों की मानें, तो यहां तैनात आरक्षक मनीष पांडे, थाना प्रभारी के संरक्षण में खुलेआम वसूली के धंधे को अंजाम दे रहा है।
रेट बिल्कुल फिक्स
इस थाने में वसूली के रेट बिल्कुल फिक्स हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ओवरलोड ट्रैक्टरों को पास कराने के लिए प्रति ट्रैक्टर 1000 रुपये ट्रैफिक और 1500 रुपये थाने के नाम पर ऐंठे जाते हैं। वहीं, ट्रकों से नो-एंट्री और ओवरलोड और ट्रैफिक के नाम पर 2500 रुपये और 3000 रुपये थाने के नाम पर वसूले जा रहे हैं। लेकिन कहानी में ट्विस्ट यहां नहीं, है बल्कि पैसे लेने के तरीके में है।
किराना स्टोर का ऑनलाइन स्कैनर!
कार्रवाई और सबूतों से बचने के लिए इस अवैध रकम को सीधे पुलिसकर्मी अपने खाते में नहीं लेते। इसके लिए इस्तेमाल किया जाता है राहुल केसरी उर्फ रिंकू के किराना स्टोर का ऑनलाइन स्कैनर! वाहन चालकों को यह स्कैनर थमा दिया जाता है। मिर्जापुर और हलिया के ड्राइवर इस स्कैनर पर 2000 और 4000 रुपये ट्रांसफर करते हैं और बाद में यह किराना संचालक एक चाय वाले के जरिए और कभी सीधे पुलिस को नगद भुगतान कर देता है। सवाल सीधा है… उत्तर प्रदेश का कोई ड्राइवर 2 हजार रुपये का सामान खरीदने हनुमना की किराना दुकान पर क्यों आएगा? कुछ दिन पहले आई कॉल रिकॉर्डिंग और अब सामने आए ट्रांजैक्शन के इन स्क्रीनशॉट्स ने इस पूरे काले साम्राज्य की पोल खोल कर रख दी है।
थाना प्रभारी पर फिर उठे सवाल
हैरानी की बात तो यह है कि इस पूरे खेल में मनीष पांडेय के साथ ‘मुसीबत’ नाम का एक प्राइवेट व्यक्ति भी शामिल है, जो आरक्षक के कमरे में रहकर इस सिंडिकेट को चला रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल हनुमना थाना प्रभारी अनिल काकडे पर उठता है। ये वही थाना प्रभारी हैं, जिनके ऊपर पहले से ही एक संगीन विभागीय जांच चल रही है। आरोप है कि इन्होंने हत्या के एक मामले को सीधे-सीधे आत्महत्या करार दे दिया था। वो तो भला हो तत्कालीन अनुभागीय अधिकारी (SDOP) का, जिन्होंने मेडिकल रिपोर्ट पढ़कर यह पकड़ा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि मर्डर था। इसके बाद आरोपी तो पकड़ा गया और थाना प्रभारी पर मऊगंज पुलिस अधीक्षक ने विभागीय जांच बैठा दी।
लेकिन यक्ष प्रश्न यह है कि जिस दागी निरीक्षक पर इतनी गंभीर जांच चल रही हो, उसे मऊगंज के इतने महत्वपूर्ण हनुमना थाने की कमान आखिर किसके इशारे पर सौंपी गई? आखिर इस दागी थाना प्रभारी को किसका संरक्षण प्राप्त है? क्या वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे डिजिटल वसूली के खेल से अनजान हैं, या फिर मौन रहकर अपनी सहमति दे रहे हैं? अब सवाल यह उठता है कि जब सारे सबूत, स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्डिंग सार्वजनिक हो चुके हैं, तो मऊगंज पुलिस के आला अधिकारी हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे हैं? क्या इस किराना स्टोर के संचालक राहुल केसरी पर कार्रवाई होगी? क्या आरक्षक मनीष पांडे और थाना प्रभारी अनिल काकडे के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल (CDR) और बैंक ट्रांजैक्शन की निष्पक्ष जांच की जाएगी?

