अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से आदिवासियों की दुर्दशा की एक ऐसी खौफनाक तस्वीर सामने आई है, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सरदमन गांव में अवैध खनन माफिया का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आदिवासी समुदाय अपनी जल, जंगल और जमीन के बाद अब अपना आशियाना बचाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। आलम यह है कि 80 साल की बुजुर्ग महिलाएं और दूधमुंहे बच्चे कलेक्ट्रेट की चौखट पर हाथ जोड़कर न्याय की भीख मांग रहे हैं। लेकिन प्रशासन की चुप्पी टूटने का नाम नहीं ले रही।
माफिया इतने ताकतवर हो गए हैं कि उन्हें न प्रशासन का डर है और न शासन का खौफ। इससे जुदा एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वह ग्रामीणों को खुलेआम धमकी देता हुआ नजर आया। दरअसल, ग्रामीणों ने माफिया का सरेआम रिवाल्वर और राइफल लेकर घूमने का विरोध किया, तो हरियाणा के रहने वाले स्टोन क्रशर संचालकों ने आदिवासियों की जान की कीमत महज 500 रुपये लगा दी। उसने कहा, ‘राइफल मेरी सुरक्षा के लिए है, तेरे लिए 500 रुपये की गोली थोड़ी खर्च करूंगा।’
आरोप है कि हरियाणा का ‘सिद्धिविनायक स्टोन क्रशर’ जो सीधी जिले के हरदी में स्थापित है, उसके पास खुद की खदान नहीं है। वह मऊगंज के सरदमन गांव में मौजूद ‘बालाजी माइंस’ से पत्थर लेता है। लेकिन रसूखदार खनन माफिया स्वीकृत क्षेत्र का उल्लंघन कर आदिवासियों की बस्ती के पास अवैध उत्खनन कर रहा है। आदिवासियों का कहना है कि चिंटू सिंह, सोनू सिंह, रणवीर सिंह और कल्लू सिंह जैसे लोग गांव में हथियार लेकर घुसते हैं, नियम विरुद्ध ब्लास्टिंग करवाते हैं और आदिवासियों को कीड़े-मकोड़े समझकर प्रताड़ित करते हैं।
पीड़ितों का दर्द ऐसा है कि सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे खाना खाने बैठते हैं, तो ब्लास्टिंग के पत्थर उनकी थाली में आकर गिरते हैं। मासूम और दुधमुंहे बच्चे पत्थरों से अपनी जान बचाने के लिए तपती धूप में किलोमीटर दूर पेड़ों के नीचे दिन गुजारने को मजबूर हैं। प्रदूषण के चलते इस इलाके की आधी आबादी पलायन कर चुकी है और जो बचे हैं, वे टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि न्याय के लिए ये आदिवासी कभी रीवा संभाग के कमिश्नर के चक्कर काटते हैं, तो कभी मऊगंज कलेक्टर संजय जैन के पास गुहार लगाते हैं। कुछ दिन पहले एक पीड़ित विधवा आदिवासी महिला ने सुनवाई न होने से तंग आकर अपर कलेक्टर के सामने ही खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की थी। लेकिन इस रोंगटे खड़े कर देने वाले कदम के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी। जब भी इस मामले में खनिज विभाग से सवाल किया जाता है, तो विभाग कैमरे के सामने एक रटा-रटाया सा जवाब देकर पल्ला झाड़ लेता है।

