मऊगंज जिले में साइबर ठगी के जाल में फंसकर मौत को गले लगाने वाली शिक्षिका रेशमा पाण्डे के सुसाइड केस में पुलिस ने उसकी खास सहेली को गिरफ्तार किया है। आरोपी महिला आंचल तिवारी ने ठगों को भेजने वाला पैसा अपने पास रख लिया था। साथ ही जिस मंगलसूत्र को बेचकर मृतिका ने ठगों को पैसे भेजने के लिए दिए थे वह भी अपने पास रख लिए थे। ठग इन्हीं पैसों को पाने के लिए दबाव बना रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, आंचल तिवारी मृतिका के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी। जिससे उसका घर भी आना जाना रहता था। 4 जनवरी को रेशमा पाण्डेय ने जालसाजों के भेजे एक क्यूआर कोड आंचल को भेजा था।जिसके बाद आंचल ने अपने पुरुष दोस्त से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करवाने की बात कही। उसने रेशमा को अगले दिन क्यूआर फ्रॉड होने की जानकारी दी। लेकिन वह इसे अनसुना कर पैसे भेज रही थी।
अगले दिन जब रेशमा के पास ठगों को देने के लिए पैसे नहीं थे तो उसने अपना मंगलसूत्र का लॉकेट गिरवी रखने के लिए आंचल को दे दिया, जिसकी कीमत 39 हजार रुपए थी। ठग लगातार पैसे ट्रांसफर कराने के लिए फोन कर धमकियां दे रहे थे। लेकिन आंचल ने उन्हें पैसे ट्रांसफर ही नहीं किए थे।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आंचल ने रेशमा के लिए 5 हजार 500 रुपए क्यूआर कोड में ऑनलाइन ट्रान्सफर नहीं किए थे। उसने उसी तारीख के दूसरे ट्रांजेक्शन को एडिट कर स्क्रीन शॉट रेशमा के मोबाइल पर भेज दिया था और मंगलसूत्र बेंच कर पैसे अपने पास रख लिए थे।
यह है पूरा मामला
महिला शिक्षिका को ठगों ने पुराने क्वॉइन के बदले करोड़ों रुपए कमाने का झांसा दिया था। उसे अपनी बातों में फंसाकर अलग- अलग किश्तों में पैसे मांगे थे। 25 हजार की रकम लेने के बाद भी उसे अरेस्ट करने के नाम पर लगातार पैसों की डिमांड की जा रही थी। इससे परेशान होकर महिला ने आत्मघाती कदम उठाते हुए जहर खा लिया, जिसे इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई थी।

