अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्यप्रदेश के मऊगंज में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक ‘कार्यवाहक’ साहब का ऐसा दरबार सजता है जहां नियम नहीं, ‘नोट’ और ‘नजराना’ चलता है। नो-एंट्री में मौत बांटते भारी वाहन और उनसे होने वाली लाखों की वसूली ने मऊगंज की साख को तार-तार कर दिया है। हनुमना में हुई हालिया मौत ने जब जन-आक्रोश की शक्ल ली, तो प्रशासन को रीवा से अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। लेकिन सवाल ये है कि चक्काजाम और भारी फोर्स के बावजूद ये ‘मौत के सौदागर’ रात के अंधेरे में शहर में दाखिल कैसे हो रहे हैं?
रसूख बेलगाम अफसर जैसा
इस खेल के केंद्र में है मऊगंज का स्वयंभू ‘ट्रैफिक सुल्तान’- नरेश प्रताप सिंह। पद ‘प्रधान आरक्षक’ का लेकिन रसूख बेलगाम अफसर जैसा। प्रदेश का राजपत्र कहता है कि चालान काटने का अधिकार सिर्फ अधिकृत राजपत्रित या एएसआई स्तर के अधिकारी को है, लेकिन यहां ‘कार्यवाहक’ साहब ने चालान मशीन में ही खुद को कार्यवाहक एएसआई की नियम विरुद्ध तरीके से ‘ASI’ फीड कर रखा है।
लापरवाही और मनमानी की इंतहा देखिए
एक हाइवा चालक ने आरोप लगाया है कि यातायात प्रभारी ने हाइवा का चालान मोटर साइकिल के एक्ट में काट दिया। यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि पद और पावर का खुलेआम दुरुपयोग है। आखिर किस अदृश्य आदेश के तहत एक लाइन-हाजिर कर्मचारी को पूरे जिले की ट्रैफिक व्यवस्था सौंप दी गई?
4 हजार लिया और चालान 2 हजार का काटा
स्टिंग ऑपरेशन में भ्रष्टाचार की जो परतें खुली, वो चौंकाने वाली हैं। अंतरराज्यीय बसों के प्रतिनिधियों का सीधा आरोप है कि उनसे ₹3000 प्रति माह की ‘लेवी’ मांगी जा रही है। पशु तस्करों से लेकर ट्रांसपोर्टर्स तक का दावा है कि यहां ‘मैनेजमेंट’ का रेट 2500 रु फिक्स है। भेड़-बकरियों की तस्करी करने वाली गाड़ियों से ₹12,000 की ‘मंथली’ वसूली जाती है। बुधवार और शुक्रवार का दिन साहब की ‘कमीशन वाली आंखों’ के लिए दिवाली जैसा होता है। साहब के ऊपर लगे आरोपों की लिस्ट लंबी है। बता दें कि अभी कुछ दिन पूर्व इनके ऊपर वसूली का गंभीर आरोप लगा था। मऊगंज निवासी ने आरोप लगाया था कि साहब के द्वारा 4000 रु लिया गया लेकिन 2000 का चालान काटा गया।
‘समाजसेवा’ की आड़ में उगाही
सीएम राइस स्कूल के निविदाकार के सुपरवाइजर का आरोप है कि यातायात प्रभारी हेलमेट बांटने के नाम पर चंदा मांगते हैं और बकायदा ‘डीजल पर्ची’ की डिमांड की जाती है। वर्दी के संरक्षण में चल रही यह ‘अंधेरगर्दी’ अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रही है। यातायात प्रभारी द्वारा बिना किसी लिखित आदेश के यातायात की कमान देखी जा रही है। सरकारी वाहन चलाने के लिए प्राइवेट चालक का सहारा लिया जा रहा है। आखिर इस प्रायवेट वाहन चालक के मानदेय का भुगतान किस मद से किया जा रहा है।
किसके आशीर्वाद से फल-फूल रहा
पुलिस कप्तान दिलीप सोनी कहते हैं कि व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन सवाल ये है कि क्या व्यवस्था बनाने के नाम पर नियमों की बलि दी जाएगी? जिले में अब तक ट्रैफिक थाना कोड अलॉट नहीं हुआ, हाईवे चौकी पर ताला लटका है, लेकिन वसूली की ‘समानांतर चौकी’ सड़क पर सजी है। हनुमना से मऊगंज तक बिछा यह कमीशन का जाल आखिर किसके आशीर्वाद से फल-फूल रहा है? उम्मीद है कि इस खुलासे के बाद मऊगंज से लेकर भोपाल तक के जिम्मेदार अधिकारी इस पर कड़ा संज्ञान लेंगे।
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