Bihar news: ​बिहार में सरकारी दवाओं की चोरी और कालाबाजारी करने वाले कुख्यात दवा माफिया नीरज को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। पटना में जड़ें जमाने के बाद नीरज अब अपना अवैध नेटवर्क वैशाली में फैला रहा था। पूर्वी एसपी परिचय कुमार के अनुसार, इस कार्रवाई से नीरज का करीब 10 करोड़ रुपये का नेटवर्क पूरी तरह तबाह हो गया है।

​25 वर्षों से सक्रिय था माफिया

​नीरज पिछले ढाई दशकों से इस धंधे में लिप्त है। उसकी कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी; वह सरकारी अस्पतालों के भ्रष्ट कर्मचारियों और दलालों के साथ मिलकर सरकारी दवाओं को औने-पौने दाम पर खरीद लेता था। इसके बाद, अगरतला, मधुबनी और अन्य ठिकानों पर इन दवाओं के रैपर बदलकर उन्हें नई पैकिंग में अंतरराष्ट्रीय बाजारों (बांग्लादेश और नेपाल) तथा नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में खपा देता था।

​सरकारी दवाओं की बड़े पैमाने पर तस्करी

​नीरज का जाल दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार और गया जैसे जिलों तक फैला था। वह एंटी-स्नेक वेनम (सांप के काटने का इंजेक्शन) जिसकी लागत 600 रुपये है, उसे 1500 रुपये प्रति वायल की दर से असम और नागालैंड भेजता था। साथ ही, कोडीन युक्त कफ सिरप की खेप बड़े पैमाने पर बांग्लादेश तस्करी की जाती थी। इस पूरे खेल में ‘जगदंबा’, ‘अमर’ और ‘ऊं लॉजिस्टिक’ जैसी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिन्हें पुलिस ने आरोपी बनाया है।

​अपराध की विरासत और नेटवर्क

​नीरज को यह अपराध विरासत में मिला था; उसके पिता ने ही उसे इस अवैध धंधे में उतारा था। 2017 में जेल जाने के बाद उसकी मुलाकात दवा माफिया रविशंकर से हुई, जिसके बाद उसने ‘ए-फार्मा’ नामक फर्जी कंपनी के नाम पर नशीली सुइयों का कारोबार शुरू किया। नीरज, उसके पिता और भाई पर 2005 से लेकर 2024 तक कई संगीन मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद उसकी एक महिला मित्र से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह में उसकी संलिप्तता का पता लगाया जा सके। पुलिस अब उन बड़ी दवा कंपनियों पर भी नजर रख रही है, जो इस अवैध आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी थीं।