कानपुर. योगी सरकार भले विकास के लाख दावे करती है. टीवी, अखबारों और बड़े-बड़े पोस्टरों में विकास का खूब विकास दिखाया जाता है. यहां तक कि प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ भी उत्तरप्रदेश में वर्ल्ड की बेस्ट सुविधा देने का भी दावा और वादा करते हैं, लेकिन असल में उनका नकारा सिस्टम एक मासूम जिंदगी को इलाज नहीं दे सका है, जिसकी वजह से 4 दिन की मासूम ने अपने दादा की गोदी में अंतिम सांसें ली. इस दौरान बेबस दादा दिल में दर्द लिए अपनी पोती को सीने से लगाए टकटकी लगाए अपनी पोती को गोदी में लेकर निहारता रहा. जिसने भी ये तस्वीर देखी उसकी आंखें भर आई, लेकिन सरकार और उसके सिस्टम को जरा भी शर्म नहीं आई होगी! क्योंकि बच्ची की मौत महज एक आंकड़ा ही होगा. यही वजह है कि बेशर्मी के पराकाष्ठा को पार कर सिस्टम बदहाली को विकास का नाम देकर लोगों के बीच बड़ी आसानी से परोस रहा है. ऐसे में सवाल ये है कि इस बदहाली और नकारे सिस्टम की लापरवाही के जद और कितनी जिंदगियां आएंगी?

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बता दें कि हमीरपुर जिले के बिनामा गांव के रहने वाले किसान इंद्रबाबू के घर नन्हीं परी ने जन्म लिया है. इंद्रबाबू को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी पोती चंद दिनों की ही मेहमान है. उनको इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि वर्ल्ड क्लास की हेल्थ सुविधा होने के बाद भी उनकी पोती को इलाज नहीं मिलेगा और हुआ भी ऐसा ही जन्म के बाद बच्ची को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसके बाद बच्ची के परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया. इस दौरान जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दिन बात गंभीर समस्या का हवाला देकर इलाज करने से मना किया और हैलट अस्पताल रेफर किया.

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वेंटिलेटर पर सिस्टम!

वहीं जब बच्ची को परिजन हैलट अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने ये कहकर बच्ची को हटा दिया कि इससे अन्य बच्चों को भी संक्रमण फैल सकता है. जिसके बाद मजबूर परिजन तत्काल बच्ची को लेकर केजीएमयू लखनऊ पहुंचे और इलाज के लिए पर्ची कटवाकर बच्ची को भर्ती करने के लिए कहा. इस दौरान डॉक्टर ने इलाज करने साफ इंकार कर दिया और कहा कि वेंटिलेटर खाली नहीं है, वापस ले जाओ. जिसके बाद परिजन बच्ची को लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए. जहां इलाज इसीलिए नहीं मिल पाया क्योंकि वहां कोई विशेषज्ञ नहीं था.

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सिस्टम का निकला जनाजा

उसके बाद परिजनों को पीजीआई लेने जाने की सलाह दी गई. जिसके बाद परिजन बच्ची को लेकर पीजीआई पहुंचे. वहां भी इलाज करने से साफ इंकार कर दिया गया और कहा गया कि ऑपरेशन की तत्काल व्यवस्था नहीं है. बच्ची को 6 महीने बाद लेकर आना. नतीजन सोमवार को बच्ची की मौत हो गई. बच्ची की मौत के बाद तस्वीर सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही है. हमेशा की तरह सिस्टम फिर से मौत का तमाशा बनाते हुए जांच का दावा कर रहा है. यहां न सिर्फ एक मासूम की मौत हुई है, यहां उस सिस्टम का भी जनाजा निकला है, जिसको प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक सबसे बेस्ट और आधुनिक बताते थकते नहीं!