MEA Warning On Kailash Manasarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर यात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उत्तराखंड के रास्ते इस वर्ष यात्रा की शुरुआत 4 जुलाई से होगी। वहीं कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू होने से पहले भारतीय विदेश मंत्रालय (Indian Ministry of External Affairs) ने ‘भोलेनाथ’ के भक्तों के लिए चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने उन भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइज़री जारी की है जो प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के जरिए यात्रा करने वालों भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे तब तक भारत से अपनी यात्रा शुरू न करें जब तक जरूरी सभी यात्रा दस्तावेज न मिल जाएं। कन्फर्म दस्तावेजों के बिना या जरूरी दस्तावेज मिलने की उम्मीद में यात्रा शुरू करने से फंसने का खतरा बढ़ जाता है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने ये चेतावनी ऐसे समय में जारी कि है, जब नेपाल में 52 भक्तों के फंसने की जानकारी सामने आई है। ये सभी भक्त प्राइवेट टूर ऑपरेटरों के जरिए यात्रा करते समय चीन के लिए जरूरी एंट्री परमिट और वीजा के बिना नेपाल में फंस गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे तब तक भारत से अपनी यात्रा शुरू न करें जब तक जरूरी सभी यात्रा दस्तावेज न मिल जाएं।

अधिकृत टूर ऑपरेटर को ही चुनें

बयान में यह भी कहा गया है कि यात्रियों को यह पक्का करने की भी कड़ी सलाह दी जाती है कि उनका टूर ऑपरेटर सही ढंग से रजिस्टर्ड और अधिकृत हो।

सांसद सुप्रिया सुले ने मामला उठाया

शनिवार को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) ने यह मामला उठाया। उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों से दखल देने और फंसे हुए तीर्थयात्रियों को तुरंत मदद पहुंचाने की अपील की। एक्स पर पोस्ट में सुले ने स्थिति के बारे में बताया और अधिकारियों से मिलकर कदम उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले लगभग 52 भारतीय नागरिक अभी नेपाल के काठमांडू में फंसे हुए हैं। उन्हें तुरंत मदद की जरूरत है। उन्होंने विदेश मंत्री और नेपाल और चीन में मौजूद भारतीय दूतावासों से भी दखल देने का अनुरोध किया।

क्या है पूरा मामला

दरअसल कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर निकले लगभग 52 भारतीय भक्त जरूरी कागजात नहीं होने के कारण नेपाल की राजधानी काठमांडू में फंस गए हैं। ये सभी 20 जून को कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे। जत्था नाथू ला दर्रे से भारत-चीन सीमा पार करके चीन में दाखिल हुए थे। हालांकि जरूरी कागजात नहीं होने के कारण चीन ने आगे जाने से रोक दिया। काठमांडू में फंसे ये सभी यात्री पुणे के निवासी हैं। दावा है चीन की सरकार ने इन्हें यात्रा के लिए आवश्यक परमिट जारी कर दिए थे और शुल्क भी वसूल लिया था लेकिन अंतिम समय में उनके वीजा रोक दिए गए। पिछले चार दिनों से ये सभी यात्री काठमांडो में वीजा का इंतजार कर रहे हैं। 

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