राकेश कथूरिया, कैथल. जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण (डीएलएसए), कैथल के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी कंवल कुमार ने बताया कि माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवाएं प्राधिकरण तथा मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में देशव्यापी विशेष अभियान मेडिएशन फॉर द नेशन 3.0 का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित तथा समझौते की संभावना वाले मामलों का सौहार्दपूर्ण, त्वरित एवं कम खर्च में समाधान सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि 1 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक मध्यस्थता योग्य मामलों की पहचान की जाएगी, जबकि 1 अक्टूबर 2026 से अभियान का विधिवत शुभारंभ होगा। इस दौरान वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस (धारा-138 एनआई एक्ट), वाणिज्यिक एवं व्यापारिक विवाद, सेवा संबंधी मामले, समझौता योग्य आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, विभागीय वसूली, संपत्ति विभाजन, किरायेदारी एवं बेदखली विवाद, भूमि अधिग्रहण तथा अन्य उपयुक्त सिविल मामलों को मध्यस्थता के लिए चिन्हित किया जाएगा।

सीजेएम कंवल कुमार ने कहा कि मध्यस्थता ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें निष्पक्ष मध्यस्थ की सहायता से दोनों पक्ष आपसी सहमति के आधार पर विवाद का समाधान करते हैं। इससे समय, धन की बचत होती है तथा आपसी संबंध भी सुरक्षित रहते हैं। मध्यस्थता की पूरी प्रक्रिया गोपनीय होती है और पक्षकार अपनी सुविधा एवं सहमति से समाधान तक पहुंच सकते हैं।

उन्होंने जिले के नागरिकों, अधिवक्ताओं, सरकारी विभागों, संस्थानों तथा न्यायालयों में लंबित मामलों के पक्षकारों से इस विशेष अभियान का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। जिन व्यक्तियों के मामले न्यायालयों में लंबित हैं अथवा जो न्यायालय में वाद दायर करने से पहले विवाद का समाधान चाहते हैं, वे जिला न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र, कैथल या जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, कैथल से संपर्क कर सकते हैं।

उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान मध्यस्थता योग्य मामलों की सूची न्यायालयों के नोटिस बोर्ड, बार एसोसिएशन तथा संबंधित आधिकारिक वेबसाइटों पर भी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पहल का लाभ उठा सकें।

सीजेएम कंवल कुमार ने कहा कि किसी भी प्रकार की सहायता, जानकारी या मध्यस्थता संबंधी मार्गदर्शन के लिए आमजन जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, कैथल के हेल्पलाइन नंबर 01746-235759 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, न्यायालयों में लंबित मामलों के पक्षकार अपने संबंधित न्यायालय के समक्ष आवेदन देकर अपने मामले को मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र भेजे जाने का अनुरोध भी कर सकते हैं, जिससे विवाद का सौहार्दपूर्ण, त्वरित और कम खर्च पर समाधान संभव हो सके।