शब्बीर अहमद, भोपाल। पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। निर्वाचन आयोग (Election Commission) से कोई राहत न मिलने के बाद कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर दी है, जहां मामला लिस्टेड भी हो चुका है। आज सुबह 10:30 बजे तक यह तय हो जाएगा कि इस अति-महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई कब होगी।

राष्ट्रपति से मिलने का मांगा समय, दिल्ली में जुटेंगे विधायक

इस बड़े कानूनी और राजनैतिक संकट से निपटने के लिए कांग्रेस के शीर्ष कानूनी दिग्गजों विवेक तंखा और अभिषेक मनु सिंघवी समेत कई सीनियर नेताओं ने कमान संभाल ली है और पूरी तैयारी के साथ अदालत में पक्ष रखने के लिए मुस्तैद हैं।
इस मामले को लेकर कांग्रेस सिर्फ कानूनी ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर राजनैतिक लड़ाई लड़ने के मूड में भी नजर आ रही है। कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम से अवगत कराने और अपना पक्ष रखने के लिए राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा है। कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति से मिलकर इस विषय पर हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

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दिल्ली पहुंचने के निर्देश: हाईकमान ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश के सभी कांग्रेस विधायकों को 12 जून तक अनिवार्य रूप से दिल्ली पहुंचने के निर्देश जारी किए हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र एक कथित ‘अपराधिक प्रकरण’ को छिपाने के आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद से ही कांग्रेस हमलावर है। कांग्रेस का साफ कहना है कि मीनाक्षी नटराजन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उनके साथ जानबूझकर अन्याय किया गया है। अब चूंकि चुनाव आयोग से कांग्रेस की उम्मीदें टूट चुकी हैं, इसलिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के समक्ष अपनी बात रखने में झोंक दी है। आज होने वाली सुनवाई के समय पर पूरे प्रदेश की सियासी नजरें टिकी हुई हैं।

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