न्यामुद्दीन अली, अनूपपुर। जिले में रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद है कि उन्होंने खनन के लिए केवई नदी का प्रवाह ही रोक दिया। माफियाओं ने रेत निकालने के लिए नदी के बीचों-बीच अस्थाई सड़क बना दी। जिससे नदी का पानी रुक गया और बहाव प्रभावित हो गया। मामले के गंभीर मानते हुए माननीय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी।

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हाई कोर्ट में दायर की गई याचिका

अनूपपुर निवासी द्वारा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया गया है कि जिले में संचालित रेत खदानों में नियमों को ताक पर रखकर मशीनों और अस्थाई मार्गों के जरिए अवैध तरीके से खनन किया जा रहा है। याचिका में कहा गया कि केवई नदी के बीच सड़कनुमा रास्ता बनाकर पानी का प्रवाह मोड़ दिया गया, जिससे नदी की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है।

जस्टिस प्रणय वर्मा और जे, के. पिल्लई की बेंच में सुनवाई

अनूपपुर निवासी द्वारा लगाई याचिका की सुनवाई जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जे. के. पिल्लई की खंडपीठ में हुई। जहां कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

नदी ने बदल लिया अपना रास्ता

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी का प्रवाह इसी तरह बाधित रहा तो आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है। नदी में पानी रुकने और बहाव प्रभावित होने से आसपास के गांवों में भूजल स्तर गिरने की आशंका है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा क्योंकि खेती और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा।

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जिम्मेदार विभाग ने साधी चुप्पी

ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया मुनाफे के लिए पर्यावरण और जल स्रोतों से खिलवाड़ कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। फिलहाल हाई कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है और अब सबकी नजर 22 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।

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