चंकी बाजपेयी, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक बार फिर विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। शहर के द्वारिकापुरी थाना क्षेत्र में कुछ नाबालिग बच्चों के बीच महज टोपी उछालने को लेकर विवाद हुआ और देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया। एक नाबालिग ने दूसरे पर सरेराह चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस घटना ने एक बार फिर डराने वाले सच को सामने ला दिया है कि कैसे आज के बच्चों में चाकूबाजी और रौब जमाने का क्रेज तेजी से फैल रहा है।
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मामूली बात पर खूनी खेल
घटना द्वारिकापुरी इलाके की है। खेल-खेल में बच्चों के बीच टोपी उछालने की बात पर कहासुनी हुई थी। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में नाबालिगों ने जेब से धारदार चाकू निकाल लिया और अपने ही साथी पर हमला कर दिया।
सड़क पर बिखरा खून
हमला इतना खतरनाक था कि घटनास्थल पर सड़क पूरी तरह से खून के धब्बों से सन गई। वारदात को अंजाम देकर आरोपी लड़के मौके से भाग निकले। घायल नाबालिग को लहूलुहान हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। पुलिस अब फरार नाबालिगों की तलाश कर रही है।
नाबालिगों में ‘चाकू’ का ये क्रेज क्यों?
रील्स और सोशल मीडिया का ‘गैंगस्टर’ भूत
आजकल इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर ‘भाईचारा’, ‘खौफ’ और ‘बदला’ जैसे गानों पर रील्स बनाने का ट्रेंड युवाओं और नाबालिगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। खुद को इलाके का ‘डॉन’ या ‘भाई’ दिखाने की चाहत में बच्चे असल जिंदगी में भी हथियार रखने को ‘कूल’ समझने लगे हैं।
ऑनलाइन आसानी से मिल रहे हथियार
पुलिस की तमाम पाबंदियों के बाद भी ई-कॉमर्स साइट्स और स्थानीय बाजारों से नाबालिगों तक फोल्डिंग और बटन वाले चाकू आसानी से पहुंच रहे हैं।
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कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
सरेराह हुई इस चाकूबाजी की घटना ने इंदौर पुलिस की दावों और न्याय व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पुलिस की पैनी नजर और काउंसलिंग की कमी के कारण अब छोटी-छोटी कॉलोनियों में नाबालिगों के छोटे-छोटे गैंग पनपने लगे हैं जो जरा सी बात पर जान लेने पर उतारू हो जाते हैं।

