प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड की यात्रा खत्म कर रविवार को स्वीडन पहुंच गए हैं. रविवार को प्रधानमंत्री मोदी का विमान गोथेनबर्ग एयरपोर्ट पर उतरा तो प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने खुद उन्हें रिसीव किया. मोदी का यह दौरा 8 साल बाद हुआ है. इससे पहले जब उनका विमान स्वीडन के एयरस्पेस में पहुंचा तो स्वीडन के लड़ाकू विमानों ने उसे एस्कॉर्ट किया. पीएम मोदी के इस दौरे से भारत और स्वीडन के बीच व्यापार, इनोवेशन, ग्रीन टेक्नोलॉजी और उभरते क्षेत्रों में संबंधों के और गहरे होने की उम्मीद है.
स्वीडन का यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के नीदरलैंड्स के दो दिन के आधिकारिक दौरे के ठीक बाद हो रहा है. प्रधानमंत्री ने इससे पहले 2018 में पहली बार आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन का दौरा किया था.
स्वीडन क्यों गए हैं PM मोदी?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. इस बातचीत का मकसद भारत-स्वीडन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करना और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर तलाशना है. विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेता द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग के नए रास्ते तलाशेंगे. यह व्यापार अब 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. साथ ही, भारत में स्वीडन का एफडीआई भी 2.825 अरब डॉलर (2000–2025) तक पहुंच चुका है.
उम्मीद है कि चर्चा का मुख्य केंद्र हरित परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, मजबूत सप्लाई चेन, रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष सहयोग, जलवायु कार्रवाई और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना होगा. स्वीडन को यूरोप की अग्रणी इनोवेशन-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता है. ऐसे में दोनों देश भविष्य-उन्मुख क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग का विस्तार करना चाहते हैं.
इस दौरे का एक मुख्य आकर्षण ‘यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री’ में प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन की भागीदारी होगी. यह व्यापार जगत के नेताओं का एक प्रमुख अखिल-यूरोपीय मंच है. दोनों नेता यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ मिलकर इस सभा को संबोधित करेंगे.
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