मोहाली। पंजाब सरकार द्वारा कैंसर को अधिसूचित बीमारी घोषित किए जाने के बाद मोहाली जिले में कैंसर से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब जिले के सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को कैंसर से पीड़ित प्रत्येक मरीज का रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ महामारी रोग अधिनियम, 1897 सहित अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

नए निर्देशों के दायरे में सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, डायग्नोस्टिक लैब, नर्सिंग होम, आयुष चिकित्सा संस्थान, बीमा कंपनियां और कैंसर मरीजों से संबंधित जानकारी रखने वाले अन्य संस्थान भी शामिल हैं। सभी संस्थानों को कैंसर मरीजों के लिए अलग रजिस्टर तैयार करना होगा, जिसमें पहले से उपचाराधीन और नए मरीजों का पूरा रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक संस्थान हर महीने नए और उपचाराधीन कैंसर मरीजों का विवरण सिविल सर्जन कार्यालय को भेजे। इस प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिस पर सभी संबंधित संस्थानों का पंजीकरण आवश्यक होगा। सिविल सर्जन कार्यालय यह सुनिश्चित करेगा कि जिले के सभी अस्पताल और जांच केंद्र समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।

सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से मोहाली सहित पूरे पंजाब में कैंसर के वास्तविक मामलों का सटीक आंकड़ा तैयार किया जा सकेगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि बीमारी किन क्षेत्रों और आयु वर्गों में अधिक फैल रही है। साथ ही दवाओं की उपलब्धता, जांच, स्क्रीनिंग अभियान और उपचार संबंधी योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि मरीजों की निजी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी।

नए नियमों का क्या होगा असर?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिले में कैंसर मरीजों का एक केंद्रीकृत और व्यवस्थित डेटाबेस तैयार होगा। इससे स्वास्थ्य विभाग को बीमारी की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में आसानी होगी और जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।