सोहराब आलम, मोतिहारी। कचहरी चौक पर गुरुवार को वित्त रहित शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि 24 अगस्त तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे पूरे राज्य में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए, जिन्हें कांग्रेस सेवा दल का भी भरपूर समर्थन मिला।
या तो सरकार वेतन दे, या कफन में दफन कर दे
धरना प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों का आक्रोश और पीड़ा साफ तौर पर झलक रही थी। प्रदर्शनकारियों ने नारा दिया कि या तो सरकार हमें वेतन दे, नहीं तो कफन में दफन कर दे। शिक्षकों का कहना था कि वे लंबे समय से आर्थिक तंगी और दयनीय हालातों का सामना कर रहे हैं। राज्य के लगभग हर प्रखंड में कम से कम एक वित्त रहित विद्यालय है, जहां शिक्षक बिना किसी वेतन के लगातार बच्चों को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। भारी आर्थिक तंगी के कारण कई शिक्षकों के परिवारों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वे अपने दैनिक जीवन के खर्चों को भी पूरा करने में असमर्थ हैं, बावजूद इसके वे पूरी निष्ठा से शिक्षा व्यवस्था को संभाले हुए हैं।
सरकार पर चुनाव पूर्व वादों को भुलाने का आरोप
वक्ताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि चुनाव से पहले सरकार ने वित्त रहित शिक्षकों को नियमित करने और समय पर वेतन देने का वादा किया था। लेकिन, सत्ता में आते ही उन तमाम वादों को भुला दिया गया और शिक्षकों की उपेक्षा शुरू कर दी गई।
मौके पर मीडिया को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष गप्पू राय ने कहा कि बिहार सरकार लगातार आम जनता और शिक्षकों के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों को नियमित करने के जो आश्वासन दिए गए थे, उन पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ज्ञात हो कि कांग्रेस सेवा दल द्वारा 20 जून से पूरे बिहार में चरणबद्ध तरीके से एक दिवसीय धरना आयोजित किया जा रहा है, और इसी कड़ी में मोतिहारी में भी यह प्रदर्शन किया गया।
सरकार को सीधी चेतावनी
धरना प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों और समर्थकों ने सरकार के समक्ष एक स्पष्ट मांग रखी कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द किया जाए और नियमित वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, यह अल्टीमेटम भी दिया गया कि अगर 24 अगस्त तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


