सोहराब आलम, मोतिहारी। शहर में एक बार फिर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने और शहर के शांत माहौल को अशांत करने की एक गहरी साजिश का मामला सामने आया है। नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक और संवेदनशील नरसिंह बाबा मंदिर परिसर स्थित गांधी संग्रहालय की बाहरी दीवार पर अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा कुछ आपत्तिजनक एवं भड़काऊ बातें लिख दी गई हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से जुड़े इस प्रतिष्ठित परिसर की दीवार पर इस प्रकार की हरकत होने से शहर भर में सनसनी फैल गई है और स्थानीय नागरिकों तथा विभिन्न संगठनों में तीव्र आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है।

​भड़काऊ टिप्पणियों से बिगड़ने की आशंका

​मिली जानकारी के अनुसार, गांधी संग्रहालय की दीवार पर बड़े-बड़े अक्षरों में आरएसएस एक आतंकवादी संगठन है समेत कई अन्य अमर्यादित और भड़काऊ शब्द लिखे गए हैं। इस तरह के संवेदनशील शब्दों के सार्वजनिक रूप से उजागर होने के बाद से ही स्थानीय लोगों में यह चिंता सताने लगी है कि असामाजिक तत्व सोची-समझी रणनीति के तहत शहर के आपसी भाईचारे और सामाजिक ताने-बाने को ठेस पहुंचाना चाहते हैं। इस घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि एक प्रमुख और सार्वजनिक स्थल पर इस प्रकार की हरकत का होना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

​स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों की कड़ी मांग

​सार्वजनिक स्थल पर इस तरह के आपत्तिजनक लेखन के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, व्यापारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन तथा पुलिस विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई है। लोगों का स्पष्ट रूप से कहना है कि इस प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणियां समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच वैमनस्य और तनाव पैदा कर सकती हैं। नागरिकों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे मामले की गहनता से निष्पक्ष जांच कराई जाए, संग्रहालय की दीवार पर लिखे गए सभी आपत्तिजनक शब्दों को तत्काल प्रभाव से मिटाया या साफ किया जाए, और इस घृणित कृत्य के पीछे शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान करके उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

​प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार

​फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दीवार पर इस तरह के आपत्तिजनक और भड़काऊ शब्द किसने, कब और किस नीयत से लिखे हैं। हालांकि, खबर सामने आने के बाद से ही पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है, लेकिन इस मामले में अब तक प्रशासन या स्थानीय पुलिस की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान सामने नहीं आया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि मीडिया में यह खबर प्रमुखता से आने के बाद जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों को बेनकाब करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।