सोहराब आलम, मोतिहारी। पताही प्रखंड क्षेत्र के नोनफरवा स्थित राजकीय उत्क्रमित एवं उच्च विद्यालय में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। दरअसल एक ही परिसर में संचालित दोनों विद्यालयों के चापाकल पिछले छह माह से खराब पड़े हैं, जिसके कारण सैकड़ों छात्र-छात्राएं पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं।

सड़क पार कर पानी पीने जाते हैं बच्चे

हालात इतने गंभीर हैं कि प्यास बुझाने के लिए छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल परिसर से बाहर निकलकर मुख्य सड़क पार करनी पड़ रही है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच पानी की तलाश में सड़क पार करते मासूमों पर हर समय बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है। विद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। प्यास लगने पर बच्चे खुद स्कूल का भारी लोहे का गेट खोलकर बाहर निकल जाते हैं, जबकि उन्हें रोकने के लिए न तो कोई गार्ड है और न ही पर्याप्त निगरानी की व्यवस्था।

शौचलयों की हालत भी बदतर

पानी के अभाव का असर मध्याह्न भोजन (एमडीएम) व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बर्तन धोने, बच्चों के हाथ साफ कराने और अन्य जरूरी कार्यों में भारी परेशानी हो रही है। वहीं शौचालयों की स्थिति भी बदतर हो गई है, जिससे विशेषकर छात्राओं को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अभिभावकों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी

शिक्षकों ने बताया कि कई बार मरम्मत का प्रयास किया गया, लेकिन समस्या दूर नहीं हो सकी। विभाग से नया चापाकल और बोरिंग कराने की मांग की गई है, पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। अभिभावकों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ और कोई अनहोनी हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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